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‘गांधी होना आसान नहीं’ ऐतिहासिक पत्र के साथ निशिकांत दुबे का गांधी और कांग्रेस पर हमला !

एक बार फिर अतीत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णयों पर राजनीतिक बहस छिड़ने जा रही है।

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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। बुधवार को उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लिखे गए एक पत्र को साझा किया और कांग्रेस से सवाल किया कि अगर 1972 के शिमला समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच किसी विवाद में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होनी थी, तो राजीव गांधी ने रीगन से मध्यस्थता की अपील क्यों की?

दुबे ने लिखा, “गांधी होना आसान नहीं। यह पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी के द्वारा लिखे पत्र के उत्तर में है। 1972 के शिमला समझौते के तहत जब यह तय हो गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच किसी विवाद पर बातचीत केवल दोनों देशों के बीच होगी, कोई मध्यस्थ नहीं होगा, तो भारतीय तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति रीगन से पाकिस्तान से बातचीत के लिए मदद क्यों मांगी?”

यह पहली बार नहीं है जब निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और उसके शीर्ष नेताओं पर निशाना साधा हो। 27 मई को भी उन्होंने इंदिरा गांधी के नेतृत्व में 1971 के भारत-पाक युद्ध की समाप्ति को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने दावा किया था कि तत्कालीन रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम और सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ के विरोध के बावजूद युद्ध रोका गया, जबकि उस समय पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने का अवसर था। दुबे ने कहा, “आयरन लेडी का डर और चीन का दहशत यह नहीं कर पाया? भारत के लिए फायदा अपनी भूमि तथा करतारपुर गुरुद्वारा लेना था या बांग्लादेश बनाना?”

दुबे ने 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे ‘सरेंडर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता कांग्रेस समर्थित सरकार के दौरान हुआ और 1994 में लागू किया गया, जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे। उन्होंने सवाल उठाया कि इस समझौते में भारतीय सेना की तैनाती, नौसेना और वायुसेना की कार्रवाई के बारे में पाकिस्तान को 15 दिन पहले सूचित करना क्यों तय हुआ — “क्या ये देशद्रोह नहीं है?”

दुबे ने यह भी कहा कि हाल ही में सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और विदेशी मीडिया ने भी भारत के दावों की पुष्टि की है। ऐसे में कांग्रेस की सरकारों की नीतियों की तुलना वर्तमान सरकार से करते हुए उन्होंने पूछा कि कौन वास्तव में देशहित में खड़ा है?

भाजपा सांसद के इस हमले को कांग्रेस के पाकिस्तान नीति, युद्ध निर्णयों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भूमिका पर सवाल खड़ा करने की एक संगठित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इससे एक बार फिर अतीत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णयों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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