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Tuesday, January 13, 2026
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राहुल गांधी के खिलाफ बोलना पड़ा महंगा, 6 साल के लिए किया निष्कासित किए गए दिग्विजय के भाई

राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और उमर अब्दुल्ला को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पार्टी को रास नहीं आई।

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया है। कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आरोप लगाते हुए यह फैसला लिया, जिसमें कहा गया है कि लक्ष्मण सिंह के हालिया बयानों ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है। खास तौर पर राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और उमर अब्दुल्ला को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पार्टी को रास नहीं आई।

गुना जिले में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान लक्ष्मण सिंह ने दावा किया था कि ‘रॉबर्ट वाड्रा कहते हैं मुसलमान को सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने दिया जा रहा, इसलिए आतंकी हमला हुआ।’ साथ ही उन्होंने कहा कि ‘राहुल गांधी को ऐसी घटनाओं पर सोच-समझकर बोलना चाहिए, क्योंकि उनकी नादानी से ही आतंकियों की हिम्मत बढ़ती है।’ उन्होंने उमर अब्दुल्ला पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि ‘वह आतंकवादियों से मिले हुए हैं।’

कांग्रेस पार्टी ने इस बयान को संगठन विरोधी और अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा और 9 मई को लक्ष्मण सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अनुशासन समिति के सचिव तारिक अनवर ने उन्हें 10 दिन में जवाब देने को कहा, लेकिन प्राप्त जवाब पार्टी को असंतोषजनक लगा। इसके बाद उनके निष्कासन की सिफारिश की गई और अब उसे औपचारिक रूप दे दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया। 3 जून को दिल्ली में राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने लक्ष्मण सिंह पर सवाल पूछा तो हरीश चौधरी ने कहा था, “इंतजार करिए, जवाब मिल जाएगा।”

लक्ष्मण सिंह ने खुद भी अपने निष्कासन की संभावना को पहले ही भांप लिया था। उन्होंने कहा था, ‘अगर पार्टी को निकालना है तो आज ही निकाल दें।’ उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को चेतावनी देते हुए यह भी कहा था कि नेताओं को सोच-समझकर बयान देना चाहिए, वरना चुनाव में इसके परिणाम भुगतने होंगे।

लक्ष्मण सिंह का यह निष्कासन ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस पहले से ही आंतरिक असंतोष और नेतृत्व के खिलाफ सवालों से जूझ रही है। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई का पार्टी के अंदरूनी समीकरणों और मध्य प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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