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दानिश आज़ाद अंसारी: पसमांदा समाज की सबसे बड़ी दुश्मन है समाजवादी पार्टी

जहां भाजपा सरकार इसे अपने विकास एजेंडे का हिस्सा बता रही है, वहीं सपा पर ‘मौकापरस्त राजनीति’ करने का आरोप लग रहा है।

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सपा को पसमांदा मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन करार दिया और सवाल उठाया कि जब 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, तब उसने पसमांदा समाज के लिए कुछ क्यों नहीं किया।

समाचार एजेंसी से बातचीत में दानिश आज़ाद ने कहा, “समाजवादी पार्टी ने हमेशा पिछड़े मुसलमानों को केवल वोट बैंक के तौर पर देखा है। उनके विकास के लिए कोई नीति, योजना या प्रयास नहीं किया गया। एक भी बयान सपा की ओर से पसमांदा समुदाय के हक़ में नहीं आया।”

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अब अखिलेश यादव को अचानक पसमांदा समुदाय की याद क्यों आ रही है? क्या यह आने वाले विधानसभा चुनावों की वजह से है?” उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव सिर्फ मुखौटा पहनकर पसमांदा समाज का हितैषी बनने का दिखावा कर रहे हैं, लेकिन उनकी असलियत सबके सामने है।

मंत्री दानिश आज़ाद ने कहा कि पसमांदा समाज का असली विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहा है। उन्होंने कहा, “मोदी जी के नेतृत्व में पसमांदा समाज के उत्थान के लिए योजनाएं बन रही हैं, नई नीतियां आ रही हैं और हर स्तर पर समाज को मुख्यधारा से जोड़ने का काम हो रहा है। सपा की बेचैनी इसी वजह से है।”

2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा इंडिया ब्लॉक के समर्थन में दिए गए बयान पर भी दानिश आज़ाद ने हमला बोला। उन्होंने कहा, “इंडी अलायंस एक डूबता हुआ जहाज है, जिसे उसके ही साथी अब छोड़ते जा रहे हैं। हमने पहले दिन से कहा था कि यह गठबंधन निजी स्वार्थों पर आधारित है और इसका टूटना तय है। पहले ही कई राज्यों में इसका अंदरूनी टकराव उजागर हो चुका है।”

दानिश आज़ाद अंसारी के इस बयान से साफ है कि 2027 के चुनावों को लेकर राजनीतिक रणनीतियों में पसमांदा समाज एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। जहां भाजपा सरकार इसे अपने विकास एजेंडे का हिस्सा बता रही है, वहीं सपा पर ‘मौकापरस्त राजनीति’ करने का आरोप लग रहा है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।

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