जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने पाकिस्तान की चेतावनियों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि भारत सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) पर अपना रुख नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा, “पानी कहीं नहीं जाएगा… हमें झूठी धमकियों से डर नहीं लगता। जो कहना है, वह कहें। फैसला भारत सरकार का होगा और वह राष्ट्रहित में होगा।”
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने नेशनल असेंबली में धमकी भरे अंदाज़ में कहा था, “भारत के पास दो विकल्प हैं: या तो पानी को न्यायसंगत रूप से साझा करे, या फिर हम छहों नदियों से पानी लेंगे। अगर पानी को हथियार बनाया गया, तो पाकिस्तान को जवाब देना पड़ेगा — और हम भारत को पहले भी हरा चुके हैं।” भुट्टो ने यह भी आरोप लगाया कि भारत द्वारा संधि को अस्थायी रूप से निलंबित करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और यह आक्रामकता का कार्य है।
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की धमकी का जवाब देते हुए भारत के जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा, “वो खून और पानी के बहने की बात करता है, लेकिन हमें ऐसी गीदड़ धमकियों से तो हम डरते नहीं।कुछ बातें समय पर ही उचित लगती है, इसीलिए उसका ज़वाब भी समय पर ही मिलेगा। ”
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— Economic Times (@EconomicTimes) June 26, 2025
बता दें की भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को ‘abeyance’ में डाल दिया था, जिसमें 26 हिंदू मारे गए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत को पत्र लिखकर IWT को बहाल करने की मांग की थी, जिसे भारत ने खारिज कर दिया।
भारत सरकार अब सिंधु प्रणाली की पश्चिमी नदियों — चिनाब, झेलम और सिंधु — के अतिरिक्त जल को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तक पहुँचाने की योजना पर काम कर रही है। इस उद्देश्य से एक 113 किमी लंबी नहर के निर्माण की संभाव्यता अध्ययन (feasibility study) की जा रही है। जल शक्ति मंत्रालय ने इस दिशा में कई बुनियादी ढांचे के कार्यों को प्राथमिकता पर तेज कर दिया है। जम्मू से 155 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित बागलीहार जलविद्युत परियोजना, जो चिनाब नदी पर बनी है, इस योजना का अहम केंद्र बन सकती है।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में साफ कहा, “नहीं, यह संधि कभी बहाल नहीं की जाएगी। हम जो पानी अब तक पाकिस्तान को देते थे, उसे राजस्थान तक लाया जाएगा। पाकिस्तान को जो पानी अन्यायपूर्ण रूप से मिल रहा था, अब वह नहीं मिलेगा।”
सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना पर जल शक्ति मंत्रालय ने त्वरित कार्यवाही शुरू कर दी है। परियोजना का उद्देश्य है कि वह पानी, जो पाकिस्तान को मिल रहा था, अब भारत के शुष्क और जल-वंचित क्षेत्रों में इस्तेमाल हो।
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