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Saturday, March 7, 2026
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फ्रांस से ₹3.25 लाख करोड़ के राफेल सौदे में भारत की सख्त अपरिवर्तनीय शर्तें

तकनीक हस्तांतरण और स्वदेशी हथियारों पर जोर

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भारत और फ्रांस के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर उच्चस्तरीय वार्ता चल रही है। अगले दो से तीन दिनों तक चलने वाली इन बातचीतों में भारत ने डसॉल्ट एविएशन के सामने कई अपरिवर्तनीय (नॉन-नेगोशिएबल) शर्तें रखी हैं। यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो इसकी अनुमानित लागत लगभग ₹3.25 लाख करोड़ होगी, जो अब तक की भारत की सबसे बड़ी रक्षा खरीद मानी जाएगी।

इस सौदे के तहत 114 नए विमानों के शामिल होने पर भारत का कुल राफेल बेड़ा 176 विमानों का हो जाएगा। वर्तमान में IAF के पास 36 राफेल सेवा में हैं, जबकि भारतीय नौसेना ने INS विक्रांत के लिए 26 राफेल-एम संस्करण का ऑर्डर दिया हुआ है।

भारत की प्रमुख शर्तों में सभी 114 विमानों में स्वदेशी हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद का पूर्ण एकीकरण शामिल है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, डसॉल्ट को सुरक्षित डेटा लिंक भी उपलब्ध कराने होंगे ताकि भारतीय रडार और सेंसर के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी स्थापित हो सके और इमेजरी ग्राउंड-आधारित कंट्रोलरों तक भेजी जा सके। हालांकि, सोर्स कोड फ्रांस के नियंत्रण में ही रहेंगे। समझौते के तहत डसॉल्ट को हथियार प्रबंधन और डेटा एक्सचेंज के लिए एकीकृत कमांड सिस्टम जोड़ना होगा, जिसके लिए ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सॉफ्टवेयर में बदलाव आवश्यक होंगे।

सूत्रों के मुताबिक, तकनीक हस्तांतरण (ToT) एयरफ्रेम निर्माण तक विस्तारित होगा। इंजन निर्माता सैफ्रान और एवियोनिक्स प्रदाता थेल्स जैसे आपूर्तिकर्ता इसमें भाग लेंगे। इसके परिणामस्वरूप एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स के लिए ToT के बाद विमानों में 55 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री होने का अनुमान है।

IAF फिलहाल F3R स्टैंडर्ड के राफेल उड़ा रही है, जो फ्रांसीसी वायुसेना के कॉन्फ़िगरेशन के अनुरूप है। इसके बाद डसॉल्ट ने उन्नत F4 संस्करण पेश किया है और भारत F4 तथा आगामी F5 संस्करणों के मिश्रण की मांग कर रहा है। नए मानकों में अगली पीढ़ी के AESA रडार, उन्नत सेल्फ-प्रोटेक्शन सिस्टम, लंबी दूरी की पहचान क्षमता, बेहतर मिसाइल एकीकरण, उन्नत सैटेलाइट लिंक और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आधारित एल्गोरिद्म शामिल होंगे, जो पायलट को स्थिती में बेहतर जागरूकता और तेज निर्णय में मदद करेंगे।

यह खरीद ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत होगी। सितंबर 2025 में डसॉल्ट ने Dassault Reliance Aerospace Limited (DRAL) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51 प्रतिशत कर ली थी, जिससे यह उसकी बहुसंख्यक स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन गई। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर DRAL में प्रमुख भारतीय साझेदार बनी हुई है। 114 विमानों में से 12 से 18 को फ्लाई-अवे कंडीशन में दिया जाएगा, जबकि शेष का निर्माण देश में होगा। अंबाला एयर फ़ोर्स स्टेशन पर राफेल का प्रशिक्षण और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) केंद्र पहले से कार्यरत है। इसके अलावा, सैफ्रान ने जून 2025 में हैदराबाद में अपने इंजन के लिए MRO हब का उद्घाटन किया था।

IAF पर परिचालन दबाव बना हुआ है, जहां स्क्वाड्रन संख्या 29 रह गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। इस कमी को दूर करने के लिए वायुसेना ने HAL से 180 तेजस MK-1A विमानों का ऑर्डर दिया है। दीर्घकालिक योजना के तहत 2035 के बाद स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के शामिल होने की भी परिकल्पना है। ऐसे में यह प्रस्तावित राफेल सौदा भारत की वायु शक्ति के आधुनिकीकरण और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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