अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से अधिक तेल आयात करने पर सहमति जताई है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब बीते एक वर्ष से अधिक समय से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, टैरिफ और भारत की रूस के साथ ऊर्जा साझेदारी को लेकर तनाव बना हुआ था। हालांकि, भारतीय पक्ष की ओर से अब तक रूसी तेल को लेकर किसी आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख नहीं किया गया है।
मंगलवार को व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा, “भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदने पर सहमत हो गया है।” उन्होंने यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापारिक दबाव और टैरिफ धमकियों की पृष्ठभूमि में की। ट्रंप लगातार भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात को एक प्रमुख विवाद का मुद्दा बताते रहे हैं, जिसे उन्होंने यूक्रेन युद्ध से भी जोड़ा।
इस अवधि के दौरान ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बनाया और बार-बार ऊँचे टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। एक मौके पर उन्होंने यह तक कहा था कि भारत को इस बात की परवाह नहीं है कि यूक्रेन में कितने लोग रूस-यूक्रेन के कारण मारे जा रहे हैं। इसके बावजूद, भारत ने अपना रुख बनाए रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि सरकार देशहित में फैसले लेगी, भले ही इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहजता क्यों न हो।
सोमवार देर रात ट्रंप ने व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए बताया कि अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत के पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसके बदले भारत अमेरिकी उत्पादों पर अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने जा रहा है, जिन्हें संभावित रूप से शून्य तक लाया जा सकता है। इसके साथ ही, अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारतीय आयात पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को भी वापस ले लिया है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “आज सुबह भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात करके मुझे बहुत अच्छा लगा। वह मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और अपने देश के एक ताकतवर और सम्मानित नेता हैं। हमने कई बातों पर बात की, जिसमें ट्रेड और रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करना शामिल था। वह रूसी तेल खरीदना बंद करने और यूनाइटेड स्टेट्स और शायद वेनेजुएला से ज़्यादा तेल खरीदने के लिए सहमत हो गए।”
इसके विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने देर रात के पोस्ट में केवल टैरिफ घटाए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आज मेरे प्यारे दोस्त प्रेसिडेंट ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। मुझे खुशी है कि मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स पर अब 18% टैरिफ कम होगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 बिलियन लोगों की ओर से प्रेसिडेंट ट्रंप को बहुत-बहुत धन्यवाद।” इस पोस्ट में रूसी तेल या उसके आयात को रोकने का कोई जिक्र नहीं था।
वर्तमान में भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत रूस से आयात करता है। विदेश मंत्रालय ने पहले इस नीति को अस्थिर वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ता के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक बताया है। वहीं, अमेरिका की ओर से दबाव केवल ट्रंप तक सीमित नहीं है। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भी चेतावनी दी थी कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं में आना ही होगा, अन्यथा इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे।
भारत ने हाल के वर्षों में अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के कदम भी उठाए हैं। अमेरिकी कच्चा तेल अब भारत के कुल तेल आयात का लगभग 10 प्रतिशत हो गया है और अमेरिकी एलपीजी के लिए भी एक वर्षीय समझौता किया गया है। इसके अलावा, भारत ने 2025 में SHANTI विधेयक पारित कर परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया, जिसे अमेरिका लंबे समय से चाहता रहा है।
ट्रंप ने रूसी तेल के खिलाफ अपने रुख को यूक्रेन युद्ध से जोड़ते हुए कहा है कि तेल रूस की अर्थव्यवस्था का लगभग 20 प्रतिशत और उसके निर्यात राजस्व का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में भारत द्वारा रूसी तेल आयात अमेरिका के प्रयासों को कमजोर करता है। हालांकि, ट्रंप के दावों के बावजूद अब सबकी निगाहें भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया और इस समझौते के वास्तविक प्रावधानों पर टिकी हैं।
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