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Monday, June 22, 2026
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हर क्षेत्र में निर्णय उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों को लेने चाहिए : मोहन भागवत!

22वें वार्षिक अधिवेशन और 'रोल ऑफ कैनाइन इन वन हेल्थ: बिल्डिंग पार्टनरशिप्स एंड रिजॉल्विंग चैलेंजेज' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। 

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को एक अलग और सशक्त वेटरिनरी काउंसिल के गठन की पैरवी की। उन्होंने कहा कि जानवरों और जनसुरक्षा से जुड़े फैसले वेटरिनरी डॉक्टरों और विषय-विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही होने चाहिए।

भागवत नागपुर में इंडियन सोसायटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ कैनाइन प्रैक्टिस (आईएसएसीपी) के 22वें वार्षिक अधिवेशन और ‘रोल ऑफ कैनाइन इन वन हेल्थ: बिल्डिंग पार्टनरशिप्स एंड रिजॉल्विंग चैलेंजेज’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

इसका आयोजन आईएसएसीपी, महाराष्ट्र एनिमल एंड फिशरी साइंसेज यूनिवर्सिटी (एमएएफएसयू), नागपुर और नेशनल एसोसिएशन फॉर वेलफेयर ऑफ एनिमल्स एंड रिसर्च (एनएडब्ल्यूएआर) ने संयुक्त रूप से किया।

अपने संबोधन की शुरुआत में भागवत ने कहा, “मैंने इसी कॉलेज में पढ़ाई की है। हालांकि मुझे वेटरिनरी क्षेत्र छोड़े 50 साल हो चुके हैं। ऐसा नहीं कि मुझे कुछ याद नहीं, लेकिन आप लोगों जितना ज्ञान अब मेरे पास नहीं है। फिर भी पूर्व छात्र के रूप में आपने मुझे बुलाया, इसके लिए मैं आभारी हूं।”

उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि-आधारित देश को तब तक लाभ मिलता रहा, जब तक किसान खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन भी करते रहे। मोहन भागवत ने वेटरिनरी पेशे के दायरे को सीमित मानने की सोच को गलत बताते हुए कहा, “पहले माना जाता था कि वेटरिनरी डॉक्टरों की भूमिका सीमित है, लेकिन यह सोच सही नहीं है। समाज, जनस्वास्थ्य और नीति निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका हो सकती है।”

दिल्ली में हाल ही में लावारिस कुत्तों को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि बहस दो चरम सीमाओं में बंट गई थी, “एक पक्ष कह रहा था कि सभी कुत्तों को मार दो, दूसरा कह रहा था कि उन्हें छुओ भी मत। लेकिन अगर इंसानों को कुत्तों के साथ रहना है, तो यह सोचना होगा कि कैसे साथ रहें।”

उन्होंने वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान पर जोर देते हुए कहा, “कुत्तों की संख्या नसबंदी के जरिए नियंत्रित की जा सकती है। इंसानों के लिए जोखिम कम करने के कई उपाय हैं। ये भावनाओं से नहीं, ज्ञान से निकले समाधान हैं।” भागवत ने बताया कि उनके विचार उनकी वेटरिनरी पृष्ठभूमि से प्रभावित हैं।

संस्थागत सुधार की मांग करते हुए भागवत ने स्पष्ट कहा, “अलग वेटरिनरी काउंसिल होनी चाहिए। मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह जरूरी है। जानवरों से जुड़े फैसले उन्हीं के हाथ में होने चाहिए जो इस विषय को समझते हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे खेलों में फैसले खेल क्षेत्र के लोग लेते हैं, वैसे ही हर क्षेत्र में निर्णय उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों को लेने चाहिए।

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