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आतंकी फंडिंग मामले में कश्मीरी अलगाववादी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

ट्रायल में देरी को बताया आधार

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 मार्च) को कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को आतंकी फंडिंग और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश से जुड़े मामले में जमानत दे दी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह राहत देते हुए कहा कि मामले की सुनवाई में काफी देरी हो रही है, जिसके आधार पर जमानत दी जा रही है।

शब्बीर अहमद शाह जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी का प्रमुख हैं और उसे जून 2019 में गिरफ्तार किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 4 अक्टूबर 2019 को दाखिल अपनी दूसरी पूरक चार्जशीट में उन्हें आरोपी बनाया था। एनआईए के अनुसार, शब्बीर शाह आरोपियों में शामिल है, जिनमें यासीन मलिक और अब्दुल राशिद शेख जैसे नाम भी है। एजेंसी का आरोप है कि ये लोग आतंकवादी संगठनों और गैरकानूनी संगठनों से जुड़े थे और कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों में शामिल थे।

बता दें की केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में गृह मंत्रालय के आदेश से शब्बीर शाह के संगठन जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार शाह पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें कश्मीर में हिंसक विरोध प्रदर्शनों को उकसाना, पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को बढ़ावा देना, मारे गए आतंकियों के परिवारों को सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि देना, हवाला लेनदेन के जरिए धन प्राप्त करना और नियंत्रण रेखा (LoC) के पार व्यापार के माध्यम से धन जुटाना शामिल है। NIA का कहना है कि इन पैसों का इस्तेमाल अलगाववादी और उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जाता था।

इससे पहले 7 जुलाई 2023 को शबीर अहमद शाह ने विशेष अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शालिंदर कौर की खंडपीठ ने उस समय कहा था कि शाह के खिलाफ लगाए गए आरोप प्राथमिक दृष्टी से सही प्रतीत होते हैं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की थी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग भड़काऊ भाषण देने के लिए नहीं किया जा सकता, जिससे देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचे। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता और अपराध के लिए उकसावे जैसे कारणों के आधार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब शब्बीर अहमद शाह को कुछ शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जा सकेगा, जबकि उसके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।

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