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सामान्य रोशनी से अलग पतली किरण, जो चांद की दूरी भी नाप सकती है, जानें क्या है ‘लेजर’?

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लेजर शब्द आजकल हर जगह सुनाई पड़ता है। बारकोड स्कैनर, लेजर प्रिंटर, आंखों की सर्जरी लगभग हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल हो रहा है। यही नहीं लेजर लाइट चांद की दूरी भी नाप सकती है। लेजर असल में क्या है और यह कैसे काम करता है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा लेजर के बारे में विस्तार से जानकारी देता है, जिसके अनुसार लेजर रोशनी की एक बहुत ही पतली किरण पैदा करता है जो कई तकनीकों और उपकरणों में काम आती है। लेजर शब्द ‘लाइट एंप्लीफिकेशन बाई स्टीमूलेटेड एमीशन ऑफ रेडिएशन का संक्षिप्त रूप है यानी उत्तेजित उत्सर्जन द्वारा रोशनी का प्रवर्धन।

कह सकते हैं कि लेजर रोशनी का एक अनोखा सोर्स है। यह आम बल्ब या टॉर्च से काफी अलग होता है। लेजर रोशनी की एक बहुत ही पतली किरण पैदा करता है। इस तरह की रोशनी कई तकनीकों और उपकरणों के लिए उपयोगी होती है।

अब सवाल है कि लेजर कैसे काम करता है? तो वैज्ञानिक बताते हैं कि इसकी किरणें तरंगों के रूप में चलती है, एक तरंग के शिखरों के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहा जाता है। सूरज की रोशनी और आम बल्ब की रोशनी कई अलग-अलग तरंगदैर्ध्य वाली रोशनियों से मिलकर बनी होती है। हालांकि, लेजर इनसे काफी अलग होता है। इसमें रोशनी की सभी तरंगों का तरंगदैर्ध्य लगभग एक जैसा होता है। लेजर की रोशनी की तरंगें एक साथ चलती हैं, जिनके शिखर एक ही लाइन में होते हैं या ‘इन-फेज’ होते हैं। यही वजह है कि लेजर किरणें पतली, चमकदार होती हैं और उन्हें एक बहुत ही छोटे बिंदु पर केंद्रित किया जा सकता है।

चूंकि लेजर की रोशनी केंद्रित रहती है और ज्यादा फैलती नहीं है, इसलिए लेजर किरणें बहुत लंबी दूरी तय कर सकती हैं। वे बहुत छोटे से क्षेत्र पर बहुत ज्यादा ऊर्जा भी केंद्रित कर सकती हैं।

लेजर के कई उपयोग किए जाते हैं। लेजर का इस्तेमाल सटीक औजारों में किया जाता है। ये हीरे या मोटी धातु को भी काट सकते हैं। इन्हें नाजुक सर्जरी में मदद करने के लिए भी डिजाइन किया जाता है। लेजर का इस्तेमाल जानकारी को रिकॉर्ड करने और उसे दोबारा पाने के लिए किया जाता है। इनका इस्तेमाल कम्यूनिकेशन, टीवी और इंटरनेट के सिग्नल ले जाने में किया जाता है। लेजर प्रिंटर, बार कोड स्कैनर और डीवीडी प्लेयर में भी देखे जा सकते हैं। ये कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पुर्जे बनाने में भी मदद करते हैं।

यही नहीं लेजर का इस्तेमाल स्पेक्ट्रोमीटर में भी किया जाता है जो वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में मदद करते हैं कि कोई चीज किन चीजों से मिलकर बनी है। नासा के ‘क्यूरियोसिटी रोवर’ ने मंगल ग्रह पर लेजर स्पेक्ट्रोमीटर का इस्तेमाल किया था। वैज्ञानिकों ने लेजर की मदद से चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी भी मापी है। लेजर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

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