28.2 C
Mumbai
Saturday, October 17, 2026
होमन्यूज़ अपडेटभारत ने पेश किया ‘स्काई रीपर’ ड्रोन, हाई-स्पीड जेट इंजन वाला UCAV...

भारत ने पेश किया ‘स्काई रीपर’ ड्रोन, हाई-स्पीड जेट इंजन वाला UCAV बदल सकता है आधुनिक युद्ध की तस्वीर

IIT-जम्मू और DRDO की साझेदारी से विकसित स्वदेशी कॉम्बैट ड्रोन; 550 किमी प्रति घंटा तक रफ्तार, स्ट्राइक मिशन में भी सक्षम

Google News Follow

भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए स्काई रीपर नामक जेट-पावर्ड मानव रहित लड़ाकू हवाई वाहन (UCAV) का अनावरण किया है। यह हाई-स्पीड कॉम्बैट ड्रोन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जम्मू और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से विकसित किया गया है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह ड्रोन भारत की स्वदेशी ड्रोन युद्ध क्षमता में बड़ी छलांग माना जा रहा है। स्काई रीपर को केवल निगरानी ड्रोन के रूप में नहीं, बल्कि बहुउद्देश्यीय कॉम्बैट प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है, जो खुफिया जानकारी जुटाने के साथ-साथ सटीक हमला करने में भी सक्षम होगा।

इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसका टर्बोजेट इंजन है, जो इसे पारंपरिक प्रोपेलर आधारित ड्रोन की तुलना में कहीं अधिक गति देता है। वर्तमान में यह 400 से 550 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और डेवलपमेंट टीम के अनुसार इसकी गति को भविष्य में और बढ़ाने पर काम चल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज रफ्तार ड्रोन को दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से बचने में मदद करेगी। तेज गति के कारण यह दुश्मन के क्षेत्र में तेजी से प्रवेश और निकास कर सकेगा, जिससे उसके इंटरसेप्ट होने की संभावना कम हो जाएगी।

स्काई रीपर को लगभग 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है। यह ऊंचाई कई शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम की पहुंच से बाहर मानी जाती है। ऊंची उड़ान और हाई-स्पीड का संयोजन इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में बेहद खतरनाक प्लेटफॉर्म बना सकता है।

ड्रोन को लंबी दूरी के मिशनों और भारी पेलोड क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह ISR यानी खुफिया, निगरानी और टोही उपकरणों के साथ-साथ स्ट्राइक म्यूनिशन भी ले जा सकता है। इसके मॉड्यूलर डिजाइन के कारण मिशन के अनुसार इसका उपयोग बदला जा सकता है।

स्काई रीपर की एक और अहम विशेषता इसका रीयूजेबल    होना है। यह आत्मघाती या एक बार इस्तेमाल होने वाले लोइटरिंग म्यूनिशन की तरह नहीं है। मिशन पूरा होने के बाद इसे वापस लाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे ऑपरेशनल लागत कम होगी।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह ड्रोन पहाड़ी क्षेत्रों, समुद्री इलाकों और अत्यधिक संवेदनशील हवाई क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसकी तकनीक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जामिंग जैसी चुनौतियों के बीच भी ऑपरेट करने में सक्षम बताई जा रही है।

हाल के वर्षों में भारत ने स्वदेशी ड्रोन और स्वायत्त युद्ध प्रणालियों पर विशेष ध्यान बढ़ाया है। IIT-जम्मू के शोधकर्ताओं द्वारा पहले भी ऐसे ड्रोन विकसित किए जाने की जानकारी सामने आई थी जो जामिंग से काफी हद तक सुरक्षित और लगभग “अदृश्य” तकनीक से लैस बताए गए थे।

विश्लेषकों का मानना है कि स्काई रीपर केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सैन्य क्षमता में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सहित भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत को हाई-स्पीड, हाई-एल्टीट्यूड और मल्टी-रोल कॉम्बैट ड्रोन क्षमता प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें:

तमिलनाडु विधानसभा में खुलकर सामने आई AIADMK की अंदरूनी लड़ाई; EPS ने किया खुलासा- “विधायकों को पैसे ऑफर किए गए”

AIADMK में फुट; 144 विधायकों के समर्थन से विजय सरकार ने जीता विश्वास मत

घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम, सेना ने मार गिराया लश्कर आतंकी

सोने पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़कर 15%: पीएम मोदी ने पहले की थी खरीद टालने की अपील

National Stock Exchange

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited
[td_block_social_counter open_in_new_window="y" style="style6 td-social-boxed" block_template_id="td_block_template_9" border_color="#fbd54a" f_header_font_size="26" f_header_font_weight="700" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXRvcCI6IjAiLCJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJwYWRkaW5nLXRvcCI6IjAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn19" custom_title="हमें फॉलो करें" facebook="NewsDankaHindi" twitter="NewsDanka" youtube="channel/UCqtL0xCsgAmB3XXrh9nln2Q" manual_count_twitter="526" f_header_font_family="668"]

अन्य लेटेस्ट खबरें