तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री Vijay के विश्वास मत के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। इस दौरान अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम(AIADMK) की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई। पार्टी महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के पलानीस्वामी (EPS) ने दावा किया कि उनकी पार्टी के विधायकों को विजय सरकार के समर्थन में वोट डालने के लिए पैसे ऑफर किए गए।
वहीं दूसरी तरफ AIADMK नेता एसपी वेलुमणि ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर खुले तौर पर विजय सरकार के समर्थन का ऐलान कर दिया। इससे विधानसभा में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले विजय को सदन में बहुमत साबित करने के लिए विश्वास मत का सामना करना पड़ा। फिलहाल उनके पास 119 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है, जिसमें AIADMK का आधिकारिक समर्थन शामिल नहीं है।
विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान EPS ने सदन में खड़े होकर आरोप लगाया कि AIADMK विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “AIADMK विधायकों को खरीदने के लिए हॉर्स-ट्रेडिंग की कोशिशें हुई हैं। मुझे जानकारी मिली है कि कुछ MLA मंत्री बन सकते हैं और सरकार में हिस्सा ले सकते हैं। आपने कहा था कि आप एक साफ़-सुथरी और ट्रांसपेरेंट सरकार चलाना चाहते हैं और हमें ऐसी ही उम्मीद है।”
EPS ने साफ कहा, “हम प्रस्ताव का विरोध करते हैं। सभी AIADMK विधायक इसके खिलाफ वोट करेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि AIADMK गठबंधन ने जनता से वोट मांगे थे और पार्टी के 47 विधायक टू लीव्स चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं। EPS ने दावा किया कि “लगभग 66 प्रतिशत लोगों ने टीवीके को वोट नहीं दिया।”
हालांकि विधानसभा में घटनाक्रम तब और नाटकीय हो गया जब स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने EPS के बाद AIADMK विधायक एसपी वेलुमणि को बोलने की अनुमति दे दी। इस फैसले का EPS गुट ने कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि एक ही पार्टी के दो अलग-अलग नेता एक ही बहस में अलग-अलग रुख के साथ नहीं बोल सकते।
इस पर स्पीकर ने कहा, एसपी वेलुमणि ने कल बात की थी और आज भी बोलने के लिए कहा था और यह उनका विशेषाधिकार है कि बहस के दौरान किसे बोलने की अनुमति दी जाए।
इसके बाद एसपी वेलुमणि ने पूरी तरह पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हुए विजय सरकार का समर्थन कर दिया। उन्होंने सदन में कहा, “लोगों की इच्छा का सम्मान करते हुए, AIADMK, मुख्यमंत्री द्वारा लाए गए कॉन्फिडेंस मोशन का समर्थन करती है।”
वेलुमणि के इस बयान ने AIADMK के भीतर चल रही कथित गुटबाजी को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया। राजनीतिक हलकों में अब इसे पार्टी के अंदर बड़े शक्ति संघर्ष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि AIADMK लंबे समय से विपक्ष की प्रमुख ताकत रही है।
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