अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर भारत में लगातार चिंता जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान के प्रति उनके नरम रवैये और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की खुलकर तारीफ ने वॉशिंगटन को नई दिल्ली के कटघरे में खड़ा किया है । हालांकि अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-पाकिस्तान संबंध पूरी तरह रणनीतिक जरूरतों पर आधारित हैं और इनका भविष्य स्थायी नहीं माना जा सकता।
अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल रुबिन ने इस पूरे मुद्दे पर बेहद तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने ‘द संडे गार्डियन’ में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि पाकिस्तान खुद को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी साबित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वॉशिंगटन की नजर में उसकी अहमियत सीमित है।
रुबिन ने लिखा कि पाकिस्तानी नेतृत्व को लगता है कि वह मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अमेरिका से सैन्य और रणनीतिक फायदे हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा, “शायद उन्हें लगता है कि ट्रंप उन्हें मिलिट्री टेक्नोलॉजी बेचकर भारत के क्वालिटेटिव और क्वांटिटेटिव मिलिट्री एडवांटेज को कम कर देंगे, या शायद मुनीर को लगता है कि वह ट्रंप को कश्मीर पर पाकिस्तान के फायदे के लिए “मीडिएट” करने के लिए फंसा सकते हैं।”
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें ट्रंप ने कश्मीर विवाद को हजार साल पुराना विवाद बताया था। रुबिन ने कहा, “ट्रंप का पहले कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के हजार साल पुराने विवाद का जिक्र इस बात को सूचित करता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इतिहास के स्टूडेंट नहीं हैं।”
लेख में रुबिन ने पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों को लेकर बेहद विवादास्पद और कठोर भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा, “वॉशिंगटन के नजरिए से, पाकिस्तान शादी करने लायक कोई औरत नहीं है, बल्कि एक ऐसी ‘वेश्या’ है जिसका इस्तेमाल करके उसे फेंक दिया जाता है। मुनीर तो बस इस धंधे का नया दलाल है।”
रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान यह मान रहा है कि वह ट्रंप प्रशासन की कमजोरियों और इतिहास संबंधी समझ की कमी का फायदा उठा सकता है, लेकिन यह रणनीति लंबे समय तक काम नहीं करेगी। उनके अनुसार अमेरिका का इतिहास बताता है कि जब तक वॉशिंगटन को पाकिस्तान की जरूरत रहती है, तब तक संबंध मजबूत रहते हैं, लेकिन जरूरत खत्म होते ही अमेरिका दूरी बना लेता है।
उन्होंने आगे कहा, “ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने वाला है और उनके बाद जो भी आएगा, चाहे वह रिपब्लिकन हो या डेमोक्रेट वह, एक बात पर जरूर सहमत होगा: पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता, और न ही अमेरिका मुनीर से किए गए ट्रंप के किसी भी वादे का सम्मान करने के लिए खुद को बाध्य समझेगा।”
हाल के महीनों में ट्रंप द्वारा पाकिस्तान और असीम मुनीर की सार्वजनिक प्रशंसा ने भारत में असहजता पैदा की है। अमेरिकी विशेषज्ञ ट्रंप की आलोचना कर बता चुके है कि ट्रंप के इस रवैय्ये से पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की कोशिशों पर असर पड़ सकता है। हालांकि अमेरिकी नीति विश्लेषकों का दावा है कि अमेरिका की प्राथमिकता हमेशा उसके अपने भू-राजनीतिक हित रहे हैं और पाकिस्तान के साथ संबंध भी उसी दायरे में देखे जाते हैं।
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