प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बीच स्कूलों और कॉलेजों से अस्थायी तौर पर ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा रही है, ऐसे में ईंधन की खपत कम करना राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन गया है।
प्रधानमंत्री ने सोमवार (11 मई )को गुजरात के वडोदरा में सरदारधाम हॉस्टल कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान यह सुझाव दिया। उन्होंने कोविड काल की तरह “रिमोट डिजिटल क्लासरूम” मॉडल अपनाने की बात कही और इसे मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों से निपटने के लिए जरूरी कदम बताया।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “अगर कोविड महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया के युद्ध से बने हालात इस दशक के सबसे बड़े संकटों में से एक हैं। जिस तरह हमने मिलकर कोविड की चुनौती को पार किया था, उसी तरह हम इस संकट से भी जरूर निकलेंगे।”
सरकार की इस पहल के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, स्कूल बसों और निजी वाहनों की आवाजाही कम होने से पेट्रोल और डीजल की खपत में बड़ी कमी आ सकती है। दूसरा, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में तेल आयात कम करना सरकार की प्राथमिकता बनता जा रहा है।
प्रधानमंत्री की यह अपील केवल शिक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इससे पहले उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर से भी वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था को फिर से लागू करने और वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। सरकार का मानना है कि डिजिटल मोड अपनाने से देश की ईंधन जरूरतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
इसके अलावा पीएम मोदी ने अपने भाषण में कई अन्य “राष्ट्रीय कर्तव्यों” का भी उल्लेख किया। उन्होंने लोगों से मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और कारपूलिंग का अधिक इस्तेमाल करने की अपील की। साथ ही नागरिकों से फिलहाल सोने की खरीदारी टालने का आग्रह भी किया, यह कहते हुए कि सोने का आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डालता है। प्रधानमंत्री ने विदेशी वस्तुओं के बजाय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की भी बात दोहराई।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। कुछ तकनीक आधारित शिक्षा संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इसे मौजूदा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है। वहीं विपक्षी दलों ने चिंता जताई है कि ऑनलाइन पढ़ाई की वापसी से ग्रामीण इलाकों और कमजोर इंटरनेट सुविधाओं वाले छात्रों के सामने फिर से “डिजिटल डिवाइड” की समस्या खड़ी हो सकती है।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से देशभर में ऑनलाइन क्लासेस लागू करने का कोई अनिवार्य आदेश जारी नहीं किया गया है। लेकिन कई राज्य सरकारें और प्रमुख शिक्षा बोर्ड प्रधानमंत्री के सुझाव की समीक्षा कर रहे हैं और आने वाले दिनों में इस पर फैसला लिया जा सकता है।
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