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ईरान की चेतावनी: अमेरिकी सहयोगी तेल ढांचे को राख में बदल देंगे

खार्ग द्वीप पर हमले का बदला लेने के लिए ईरान तैयार

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के तीसरे सप्ताह में तनाव और बढ़ गया है। ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने शनिवार (14 मार्च) को चेतावनी दी कि यदि उसके तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया तो वह मध्य पूर्व में अमेरिकी स्वामित्व वाली या अमेरिका के साथ सहयोग करने वाली कंपनियों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर जवाबी हमले करेगा। यह बयान उस समय आया जब  डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने रणनीतिक खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है।

ईरान के खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान के तेल ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया तो क्षेत्र में अमेरिकी स्वामित्व वाली या अमेरिका के साथ काम करने वाली कंपनियों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाएगा। प्रवक्ता के अनुसार ऐसे ठिकानों को नष्ट कर राख में बदल दिया जाएगा।

खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात का संचालन इसी द्वीप से होता है। यहां पर हुए अमेरिकी हमलों को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी बलों ने खार्ग द्वीप पर हर सैन्य लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। उन्होंने इसे मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक बताया। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी को बाधित करता रहा, तो द्वीप के तेल ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।

हालांकि ईरान की राज्य समर्थित समाचार एजेंसी फ़ार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि खार्ग द्वीप पर 15 से अधिक विस्फोटों की आवाज सुनी गई, लेकिन अमेरिकी हमलों में तेल ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार हमले मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों, रक्षा प्रणालियों, जोशन सी बेस, एयरपोर्ट कंट्रोल टॉवर और हेलीकॉप्टर हैंगर को निशाना बनाकर किए गए।

खार्ग द्वीप ईरान के तट से लगभग 26 किलोमीटर दूर स्थित है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से करीब 483 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में पड़ता है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के लगभग एक-पांचवें हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है।

इसी बीच ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी नौसेना जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर सकती है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार पेंटागन ने मध्य पूर्व में एक मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट भी तैनात करने का निर्णय लिया है, जिसमें आम तौर पर लगभग 2,500 मरीन और नाविक शामिल होते हैं।

बता दें की,यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामनेई की संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हमलों में मौत हो गई। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में संघर्ष फैल गया है और अब तक ईरान तथा अन्य खाड़ी देशों में 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह संकट दशकों में पहली बार पूरे खाड़ी क्षेत्र को बड़े युद्ध की कगार पर ले आया है।

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