भारत की निजी रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वीईएम टेक्नोलॉजीज़ ने स्वदेशी ‘स्लिंगशॉट एंटी-ड्रोन सिस्टम’ के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह प्रणाली आधुनिक युद्ध में तेजी से बढ़ रहे ड्रोन खतरों से निपटने के लिए विकसित की जा रही है और इसे भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
हैदराबाद स्थित वीईएम टेक्नोलॉजीज़ की स्थापना 1988 में हुई थी और आज यह कंपनी उन्नत एयरोस्पेस, निगरानी तथा हवाई प्रणालियों के डिजाइन और उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। कंपनी में 900 से अधिक विशेषज्ञ अनुसंधान, विकास और रक्षा प्रणालियों के एकीकरण पर कार्य कर रहे हैं।
ड्रोन खतरे से निपटने के लिए तैयार नई प्रणाली
‘स्लिंगशॉट’ एंटी-ड्रोन सिस्टम को ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह संदिग्ध या दुश्मन ड्रोन का पता लगा सके, उन्हें ट्रैक कर सके और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय कर सके। यह प्रणाली आधुनिक युद्ध में कम लागत वाले ड्रोन हमलों से उत्पन्न खतरे का प्रभावी जवाब देने के लिए विकसित की जा रही है।
इस प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान, रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर का उपयोग किया गया है। इसके माध्यम से दो तरह की कार्रवाई संभव होगी—
- सॉफ्ट किल: जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान के जरिए ड्रोन को निष्क्रिय करना
- हार्ड किल: काइनेटिक इंटरसेप्शन के जरिए ड्रोन को सीधे नष्ट करना। काइनेटिक इंटरसेप्शन के लिए लगभग 6 km की दुरी तय कर पाना।
यह प्रणाली लो-RCS ड्रोन के खिलाफ 20 km की दुरी तक काम करती है। MWIR, CCD कैमरा और लेज़र रेंज फाइंडर के साथ स्टेबिलाइज़्ड EO/IR पेलोड तक को सेंसर द्वारा ट्रैक किया जा सकता है। 15 km तक ड्रोन कम्युनिकेशन लिंक का पता लगाने के लिए RF डायरेक्शन फाइंडर से लैस है। यह हर तरह के मिनी, माइक्रो और स्वॉर्म ड्रोन से सुरक्षा कर सकती है।
वीईएम के अन्य रक्षा प्रोजेक्ट
स्लिंगशॉट परियोजना के अलावा कंपनी कई अन्य रक्षा प्रणालियों पर भी काम कर रही है। इनमें ‘असीबल’ (AsiBal) नामक मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल शामिल है, जिसमें ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ क्षमता है और जो फिलहाल फील्ड ट्रायल में है।
इसके अतिरिक्त ‘विस्मई’ (Vismai) मिसाइल को हेलीकॉप्टर, यूएवी और ड्रोन प्लेटफॉर्म के लिए विकसित किया गया है। वहीं ‘अजीता एयर डिफेंस सिस्टम’ सेंसर, मिसाइल और लॉन्चर के एकीकृत नेटवर्क के रूप में कार्य करता है, जबकि ‘विध्वंस’ (Vidhwams) लंबी दूरी की गाइडेड रॉकेट प्रणाली है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 250 किलोमीटर तक बताई जाती है।
एयरो इंडिया में किया प्रदर्शन
बेंगलुरु में आयोजित ऐरो इंडिया 2025 में कंपनी ने अपने स्वदेशी Ajita-SR और Ajita-LR सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम का प्रदर्शन किया। इन प्रणालियों में 360 डिग्री कवरेज देने वाले रडार, तेज प्रतिक्रिया समय और कम रडार सिग्नेचर वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता मौजूद है।
नई परीक्षण सुविधा का निर्माण
कंपनी उन्नत हथियार प्रणालियों के परीक्षण के लिए एक इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम्स फैसिलिटी भी विकसित कर रही है। इस आधुनिक परिसर में हथियार प्रणालियों के प्रोटोटाइप, परीक्षण और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर की जा सकेगी।
कंपनी के संस्थापक और अध्यक्ष वी. वेंकट राजू के नेतृत्व में वीईएम कई रक्षा अनुसंधान संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। कंपनी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़े प्रोजेक्ट्स और भारत के उन्नत लड़ाकू विमान कार्यक्रम उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) के लिए पावर सिस्टम विकसित करने में भी सहयोग कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी स्लिंगशॉट प्रणाली सीमा क्षेत्रों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके मॉड्यूलर डिजाइन के कारण इसे मोबाइल प्लेटफॉर्म पर भी लगाया जा सकेगा, जिससे सीमाओं और शहरी क्षेत्रों में त्वरित तैनाती संभव होगी।
तेजी से बढ़ते ड्रोन खतरों के बीच स्लिंगशॉट जैसे स्वदेशी सिस्टम भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि निजी क्षेत्र की ऐसी तकनीकी पहलें भारत की सैन्य आधुनिकीकरण प्रक्रिया को तेज करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करेंगी।
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