भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री कूटनीति और सामरिक सहयोग महत्वपूर्ण को मजबूती दे रहा है। भारतीय नौसेना के इस युद्धपोत ने सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया का सफलतापूर्वक दौरा किया है। सेशेल्स पोर्ट के बाद यह समुद्री जहाज अपनी अगली तैनाती के लिए रवाना हो गया है।
आईएनएस त्रिकंड का यह पोर्ट कॉल 16 मार्च से शुरू हुआ था। नौसेना के मुताबिक इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों तक पहुंचा है। आईएनएस त्रिकंड, भारतीय नौसेना का एक अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है।
सेशेल्स में अपने प्रवास के दौरान युद्धपोत ने कई महत्वपूर्ण गतिविधियों में भाग लिया है। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने सेशेल्स सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और वहां स्थित भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की।
इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया। इस दौरान सेशेल्स सरकार को आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और कई जरूरी सामग्री भी सौंपी गई। यह दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का प्रतीक भी है।
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये 2026’ में भारतीय भागीदारी रही। इस सैन्य अभ्यास पहली बार त्रि-सेवा यानी थलसेना, नौसेना और वायुसेना की भागीदारी रही। इस बार यह अभ्यास व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया।
यहां हुए सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और सेशेल्स रक्षा बल के जवानों ने मिलकर अपनी संयुक्त क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
खास बात यह रही कि इस अभ्यास में पहली बार भारतीय नौसेना ने भी भाग लिया। अभ्यास के हार्बर चरण के दौरान जहाज पर ‘विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर’ (वीबीएसएस) प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें संयुक्त बोर्डिंग ऑपरेशनों का अभ्यास किया गया।
इसके बाद समुद्री चरण में आईएनएस त्रिकंड ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज ‘ले विजिलेंट’ के साथ संयुक्त अभ्यास किया। इस दौरान भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो और सेशेल्स के विशेष बलों ने समुद्र में संयुक्त बोर्डिंग ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो और सेशेल्स रक्षा बल के जवानों ने मिलकर समुद्री जहाज पर चढ़ाई, तलाशी और नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण अभियान पूरे किए। अभ्यास में समुद्र के रास्ते घुसपैठ रोकने, ड्रोन से निगरानी, छापेमारी और घायल सैनिकों को निकालने जैसे ऑपरेशन किए गए। यह अभ्यास मुख्य रूप से अर्ध-शहरी और समुद्री सुरक्षा परिदृश्यों पर केंद्रित रहा।
अभ्यास में सेशेल्स रक्षा बल के तटरक्षक, वायु सेना और विशेष अभियान इकाई की समन्वित भागीदारी रही। भारतीय पक्ष से नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड को समुद्री अभियानों के लिए तैनात किया गया था।
अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने साथ मिलकर कई तरह के ऑपरेशन किए। अर्ध-शहरी इलाकों में घेराबंदी और तलाशी, सटीक हमले और संयुक्त योजना बनाना जैसे अभ्यास किए गए, जिससे आपसी तालमेल और भरोसा और मजबूत हुआ।
नौसेना के मुताबिक अभ्यास का एक और अहम हिस्सा प्रस्लिन द्वीप पर भारतीय सेना और सेशेल्स रक्षा बल के जवानों का संयुक्त लैंडिंग ऑपरेशन रहा, जिसने दोनों देशों की सैन्य समन्वय क्षमता को दर्शाया।
समुद्री चरण के दौरान सेशेल्स रक्षा बल के प्रमुख मेजर जनरल माइकल रोसेट, उप प्रमुख ब्रिगेडियर जीन अटाला और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने आईएनएस त्रिकंड पर सवार होकर अभ्यास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
यह अभ्यास भारत और सेशेल्स के बीच सैन्य सहयोग, पारस्परिक समझ और समुद्री सुरक्षा में तालमेल को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।
आईएनएस त्रिकंड का यह दौरा भारत की ‘महासागर’ (क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) विजन को भी प्रतिबिंबित करता है। साथ ही यह भारतीय नौसेना की इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार और प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
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