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Sunday, November 1, 2026
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चिकनगुनिया और डेंगू में है फर्क: जानिए लक्षण, रोकथाम और घरेलू उपाय

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चिकनगुनिया और डेंगू दोनों ही मच्छर से फैलने वाली बीमारियां हैं, लेकिन अक्सर लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं। असल में ये दोनों अलग-अलग वायरस से होने वाली बीमारियां हैं और इनके लक्षण भी थोड़े अलग होते हैं। अगर सही समय पर पहचान कर ली जाए तो इलाज आसान हो जाता है और मरीज जल्दी ठीक हो सकता है।

डेंगू एक वायरल बीमारी है। इसमें अचानक तेज बुखार आता है, जो 102 से 104 डिग्री तक जा सकता है। इसके साथ सिर में तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में बहुत ज्यादा दर्द और कमजोरी महसूस होती है। कई लोगों के शरीर पर लाल चकत्ते भी दिखने लगते हैं। कुछ मामलों में उल्टी, जी मिचलाना और भूख न लगना भी होता है। डेंगू की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं, जिससे शरीर कमजोर हो सकता है और गंभीर स्थिति में खून बहने का खतरा भी रहता है।

वहीं, चिकनगुनिया में भी अचानक तेज बुखार आता है, लेकिन इसमें जोड़ों में तेज दर्द रहता है। यह दर्द इतना ज्यादा हो सकता है कि मरीज को चलने-फिरने में भी परेशानी हो जाती है। हाथ, पैर, घुटने और टखनों में सूजन और अकड़न हो सकती है। कई लोगों को थकान, सिर दर्द, उल्टी और हल्के दाने भी हो जाते हैं। चिकनगुनिया में बुखार ठीक होने के बाद भी जोड़ों का दर्द हफ्तों या महीनों तक रह सकता है, जो इसे डेंगू से अलग बनाता है।

दोनों बीमारियों से बचाव का तरीका लगभग एक जैसा है। सबसे जरूरी है मच्छरों से बचना। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि वहीं मच्छर पैदा होते हैं। कूलर, गमले, टायर और बाल्टी में पानी न रुकने दें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और दिन में भी शरीर को ढककर रखें, क्योंकि ये मच्छर दिन में ज्यादा काटते हैं। मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल भी मदद करता है।

घरेलू उपायों की बात करें तो शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है। ज्यादा से ज्यादा पानी, नारियल पानी और ओआरएस लें ताकि शरीर में कमजोरी न आए। डेंगू में पपीते के पत्तों का रस और हल्का खाना अक्सर लोग इस्तेमाल करते हैं, जबकि चिकनगुनिया में हल्दी वाला दूध और गर्म सिकाई जोड़ों के दर्द में राहत देती है। आराम करना दोनों ही बीमारियों में सबसे जरूरी है।

अगर बुखार लगातार 2-3 दिन से ज्यादा रहे, शरीर में बहुत ज्यादा दर्द हो, उल्टी बार-बार हो या खून निकलने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खुद से दवा लेना या बीमारी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

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