ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिससे क्षेत्र में जारी नाजुक युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता और गहरा गई है। ईरान के इस फैसले को कूटनीतिक प्रयासों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि युद्ध लगभग दो महीने के करीब पहुंच चुका है।
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता से दूरी बनाने का फैसला अमेरिका की अत्यधिक मांगों, अवास्तविक अपेक्षाओं, लगातार बदलते रुख और विरोधाभासी बयानों के कारण लिया है। इसके साथ ही ईरान ने अपने बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब कुछ घंटों पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सोमवार (20 अप्रैल)को इस्लामाबाद पहुंचेगा, जिससे वार्ता में प्रगति की उम्मीद जगी थी। हालांकि, तेहरान की आधिकारिक पुष्टि के बाद ये उम्मीदें कमजोर पड़ गईं।
ईरान ने अमेरिकी रुख को बताया ‘असंगत’
रविवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ ने अमेरिकी नीति की आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन का रुख बचकाना और असंगत है। ईरान के अनुसार, अमेरिका एक ओर युद्धविराम और बातचीत की बात करता है, जबकि दूसरी ओर दबाव की रणनीति अपनाता है।
इससे पहले व्हाइट हाउस ने संकेत दिए थे कि पहले दौर की वार्ता का नेतृत्व करने वाले उपराष्ट्रपती जेडी वेंस इस्लामाबाद के लिए रवाना होने की तैयारी में हैं। पाकिस्तान ने भी बैठक को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी, लेकिन अब वार्ता की संभावना लगभग समाप्त होती दिख रही है।
ईरान के इस फैसले को अचानक यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पहले ईरानी सूत्रों ने संकेत दिए थे कि प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (21 अप्रैल) को पाकिस्तान पहुंच सकता है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ ने भी कहा था कि कूटनीति के क्षेत्र में कोई पीछे हटना नहीं होगा।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप की हालिया चेतावनियों ने ईरान के रुख को प्रभावित किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान अमेरिकी शर्तों को नहीं मानता, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे जैसे बिजली संयंत्र और पुल को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेहरान की “किलिंग मशीन” को खत्म कर देगा।
दोनों देशों के बीच प्रमुख विवादों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, हिज़्बुल्लाह से संबंध, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण शामिल हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले ही कह चुके हैं कि दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा की है और चेतावनी दी है कि इसके करीब आने वाले जहाज़ों को निशाना बनाया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों जहाज़ इस मार्ग के दोनों ओर फंसे हुए हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
यह भी पढ़ें:
मेंटल हाइजीन क्यों जरूरी है? आयुर्वेद से समझिए मानसिक स्वास्थ्य का रहस्य
अमेरिकी सैन्य जहाजों पर ईरान के ड्रोन हमलें
झाड़-फूंक के बहाने महिला से दुष्कर्म का आरोप, मौलवी समेत दो गिरफ्तार



