नीट (NEET) पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लातूर के आरसीसी क्लासेस के प्रमुख शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया है। रविवार (17 मई)दोपहर 2 बजे से उनसे पूछताछ शुरू हुई थी। इससे दो दिन पहले CBI ने उनके कोचिंग संस्थान के कार्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे, हालांकि उस समय उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया। अब कार्रवाई करते हुए उन्हें CBI की हिरासत में लिया गया और रविवार रात तक पूछताछ जारी रही।
नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी सामने आने के बाद एक अभिभावक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि इस कोचिंग संस्थान में पढ़ाए गए 42 प्रश्न सीधे नीट परीक्षा में पूछे गए थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू ही की थी कि इसी दौरान सीबीआई की टीम लातूर पहुंच गई और मोटेगांवकर से पूछताछ शुरू कर दी। हालांकि, प्रारंभ में यह सार्वजनिक नहीं किया गया था कि किस कोचिंग संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
शनिवार (16 मई) को यह स्पष्ट हो गया था कि सीबीआई किसी कोचिंग संस्थान के संचालक से पूछताछ कर रही है, लेकिन उसी दिन मोटेगांवकर ने दावा किया था कि वे सामान्य रूप से छात्रों को पढ़ा रहे थे। अब सोमवार सुबह उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की खबर सामने आई है।
जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा से पहले ही, यानी 23 अप्रैल 2026 को मोटेगांवकर ने नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा के प्रश्न और उत्तर हासिल कर लिए थे। 14 मई को लातूर स्थित उनके निवास स्थान पर की गई तलाशी में, उनके मोबाइल फोन में इस परीक्षा के लीक हुए प्रश्न पाए गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा संपन्न होने के बाद सबूतों को मिटाने के उद्देश्य से उन्होंने प्रश्न पत्र को डिलीट/नष्ट कर दिया था। संदेह है कि उन्होंने यह प्रश्न पत्र कई छात्रों और व्यक्तियों को उपलब्ध कराया था। हालांकि, जिन लाभार्थी छात्रों को यह पेपर दिए गए थे, उनके नाम सीबीआई (CBI) अधिकारियों को बताने में मोटेगांवकर ने टालमटोल की है।
पेपर लीक मामले में पहले से गिरफ्तार लातूर के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी, जो रसायन विज्ञान के प्राध्यापक हैं, और शिवराज मोटेगांवकर भी रसायन विज्ञान पढ़ाते रहे हैं। CBI अधिकारी अब यह जांच कर रहे हैं कि आरोपी प्रोफेसर और मोटेगांवकर के बीच किस प्रकार के संबंध थे।
लातूर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों का बैंड बजाकर स्वागत करने और तथाकथित ‘लातूर पैटर्न’ को शिक्षा की सफलता का मॉडल बताकर उसका प्रचार करने में मोटेगांवकर सक्रिय रहे हैं। उनकी हिरासत के बाद अब ‘लातूर पैटर्न’ की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि लातूर में कम से कम 30 से 32 बड़े कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहां छात्रों से लाखों रुपये की फीस ली जाती है। इस मामले ने न केवल कोचिंग उद्योग बल्कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
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