अमेरिका द्वारा दुनिया के सबसे ताकतवर पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के रूप में प्रचारित लॉकहीड मार्टिन के F-35 Lightning II F-35B एक बार फिर तकनीकी समस्याओं को लेकर चर्चा में है। ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के दो F-35B लड़ाकू विमान पिछले दो महीनों से अटलांटिक महासागर के अजोरेस द्वीप पर फंसे हुए हैं। इससे पहले इसी विमान को भारत के केरल में आपातकालीन लैंडिंग के कारण वैश्विक स्तर पर आलोचना और मजाक का सामना करना पड़ा था।
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2026 में घोषणा की थी कि उसे अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन से ऑर्डर किए गए सभी 48 F-35B जेट मिल गए हैं। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि अंतिम खेप के दो विमान अभी तक ब्रिटेन नहीं पहुंच पाए हैं।
जानकारी के अनुसार, ये दोनों जेट अमेरिका के टेक्सास स्थित फोर्ट वर्थ फैक्टरी से ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे। लेकिन उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आने के कारण उन्हें अटलांटिक में स्थित अजोरेस द्वीप के लॉजेस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों विमान पिछले करीब दो महीने से वहीं खड़े हैं और अभी तक खराबी का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह पहली बार नहीं है जब F-35B तकनीकी कारणों से सुर्खियों में आया हो। 14 जून 2025 को ब्रिटिश विमानवाहक पोत प्रिंस ऑफ वेल्स पर लौट रहे एक F-35B ने केरल के तिरुवनंतपुरम में आपातकालीन लैंडिंग की थी। उस समय विमान नियमित उड़ान पर था, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण उसे भारत में उतरना पड़ा।
उस घटना के बाद विमान एक महीने से अधिक समय तक तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर खड़ा रहा था। विमान की मरम्मत में देरी के चलते दुनिया भर में इस पर मीम्स और व्यंग्य की बाढ़ आ गई थी। यहां तक कि ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि यदि तकनीकी समस्या दूर नहीं हुई तो विमान को भारी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए वापस ले जाना पड़ सकता है। हालांकि बाद में मरम्मत पूरी होने के बाद 22 जुलाई 2025 को विमान ने केरल से उड़ान भरी थी।
इसी तरह मार्च 2025 में जापान में भी अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के एक F-35B को चेतावनी संकेत मिलने के बाद एहतियातन सिविलियन एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा था। वह विमान भी लंबे समय तक जापान के एयरपोर्ट पर खड़ा रहा और बाद में मई में वहां से रवाना हुआ।
ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स और रॉयल नेवी संयुक्त रूप से F-35B का संचालन करती हैं। ब्रिटेन ने कुल 48 F-35B जेट का ऑर्डर दिया था। इनमें से एक विमान 2021 में दुर्घटनाग्रस्त होकर नष्ट हो गया था, जबकि बाकी विमानों को अलग-अलग चरणों में शामिल किया गया।
F-35B की खासियत इसकी Short Take-Off and Vertical Landing (STOVL) क्षमता है। यानी यह छोटे रनवे और विमानवाहक पोतों से भी उड़ान भर सकता है और लगभग हेलीकॉप्टर की तरह उतर सकता है। इसी वजह से ब्रिटिश नौसेना इसे अपने एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशनों के लिए इस्तेमाल करती है।
हालांकि बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं ने इस महंगे स्टील्थ फाइटर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद F-35 कार्यक्रम लंबे समय से रखरखाव, सॉफ्टवेयर और तकनीकी खामियों को लेकर आलोचना झेलता रहा है।
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