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Thursday, October 22, 2026
होमन्यूज़ अपडेट'गूंगी गुड़िया' टिप्पणी पर एनसीपी का कांग्रेस से तीखा सवाल! 

‘गूंगी गुड़िया’ टिप्पणी पर एनसीपी का कांग्रेस से तीखा सवाल! 

पाटिल ने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक मतभेद और नीतियों के संबंध में आलोचनात्मक नजरिया दोनों जरूरी हो जाते हैं| 

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सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने मंगलवार को कांग्रेस पर एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर निशाना साधा। यह पोस्ट महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार और अजीत पवार के संदर्भ में किया गया था।

कांग्रेस ने अपने पोस्ट में कहा कि आखिर कितने दिनों तक सुनेत्रा पवार ‘गूंगी गुड़िया’ बनकर रहेंगी। कांग्रेस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने पूछा, “क्या कांग्रेस ‘गुंगी गुड़िया’ जैसे अपमानजनक वाक्यांश का सहारा लेकर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी पर लक्षित ऐतिहासिक आलोचना को परोक्ष रूप से वैधता प्रदान कर रही है?

पाटिल ने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक मतभेद और नीतियों के संबंध में आलोचनात्मक नजरिया दोनों जरूरी हो जाते हैं, लेकिन महिलाओं के संबंध में कई अपमानजनक भाषा का राजनीतिक में परिधि में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

ऐतिहासिक प्रसंगों को याद करते हुए पाटिल ने कहा कि कुछ इसी तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल इंदिरा गांधी के राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की ओर से भी उनके बारे में की गई थी, जब उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का आगाज किया था।

उन्होंने कहा, “ इंदिरा गांधी ने अपने इन राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को अपने किसी बयान के जरिए नहीं, बल्कि अपनी उपलब्धियों के जरिए जवाब दिया था। उन्होंने बांग्लादेश लिबरेशन वार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर अपने रुख की वजह से वैश्विक स्तर पर जिस तरह की मान्यता प्राप्त की, उससे उन्हें चौतरफा प्रशंसा मिली। यहां तक की उनके प्रतिद्वंदी भी इंदिरा गांधी से प्रभावित होकर उनकी प्रशंसा करने के लिए बाध्य हो जाते थे।”

एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर क्यों ऐसी शब्दाबली का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो महिलाओं के संदर्भ में अन्यायपूर्ण और आलोचनात्मक है। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या कांग्रेस द्वारा इस्तेमाल की गई यह शब्दाबली पूर्व में इंदिरा गांधी के संदर्भ में बोली गई आलोचनात्मक टिप्पणी की स्वीकृति है?

पाटिल ने इस बात को रेखांकित किया कि इससे सीमावर्ती राजनीतिक संस्कृति और महिलाओं के साथ किए गए व्यवहार की पूरी रूपरेखा जाहिर होती है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में वाद-विवाद और किसी विषय की आलोचना करने की इजाजत हैm लेकिन किसी महिला के संदर्भ में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल एक तरह से आम जनता की गरिमा पर कुठाराघात है।

अपने बयान के अंत में उमेश पाटिल ने मांग की कि कांग्रेस इस अपमानजनक टिप्पणी को वापस ले और आम जनमानस के बीच एक गरिमापूर्ण भाषा को बनाए रखे।

पार्टी पदाधिकारी सूरज चव्हाण ने भी कांग्रेस की ओलनचा की। उनके मुताबिक, कांग्रेस की हमेशा से ही सभ्य राजनीतिक विचारधारा रही है। लेकिन, मौजूदा समय में कांग्रेस अपनी इस विचारधारा और लोगों से दूर हो चुकी है।

पार्टी में महिलाओं को लेकर सम्मन सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि विचारों में भी दिखना चाहिए। हालांकि, कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया पोस्ट से उसकी विचारधारा साफ जाहिर होती है। महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी मौजूदा समय में खंडित नेतृत्व के हाथों जा चुकी है।
 
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