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Wednesday, January 14, 2026
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संभल: विवादीत मस्जीद के ढांचे पर रंगाई-पुताई की इजाजत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया आदेश!

हाईकोर्ट ने कहा कि बाहरी दीवारों पर लाइटिंग भी लगाई जा सकती है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की विवादित ढांचा मस्जिद की कमेटी को मस्जिद की बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने ढांचे की मस्जिद कमेटी की अर्जी को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया कि रंगाई-पुताई सिर्फ मस्जिद की बाहरी दीवारों पर ही की जा सकती है। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने कहा कि बाहरी दीवारों पर लाइटिंग भी लगाई जा सकती है, लेकिन यह काम किसी भी ढांचे को नुकसान पहुंचाए बिना किया जाना चाहिए।

मस्जिद कमेटी ने यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने रंगाई-पुताई कराने की अनुमति मांगी थी। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने एक सप्ताह के भीतर इस कार्य को कराने का आदेश दिया और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को इसे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह आदेश इस तर्क पर आधारित है कि मस्जिद की बाहरी दीवारों का सौंदर्यीकरण किया जा सकता है, बशर्ते इसमें कोई संरचनात्मक बदलाव न किया जाए या किसी ऐतिहासिक ढांचे को नुकसान न पहुंचे।

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मस्जिद की रंगाई-पुताई करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। जामा मस्जिद मामले में मुस्लिम पक्ष ने रंगाई-पुताई की मांग की थी। दरअसल, मस्जिद कमेटी की तरफ से इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका में उन्होंने विवादित ढांचे में रंगाई-पुताई कराने की इजाजत मांगी थी, जिस पर हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

बता दें की संभल का ढांचा पर हिंदू और मुस्लिम दोनों के बीच का विवाद है। दरअसल मस्जिदी ढांचे के बनाए जाने से पूर्व यहां हरिहर मंदिर हुआ करता था और संभल के क्षेत्र को संभलापुर नाम से जाना जाता था, मुगल शासन के दौरान इस मंदिर को तोड़कर उसे मस्जिद में बदल दिया गया था। जबकि मुस्लिम पक्ष कोर्ट में दावा कर रहा है कि यह हमेशा से मस्जिद ही रही है। हिंदू पक्ष इस स्थान को दोबारा मंदिर की माँग करते हुए, पुरातत्व खुदाई की मांग कर रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने विवादित ढांचे को ऐतिहासिक विरासत बताकर बचाने की कोशिश जारी रखी है।

बता दें की, अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मंदिर को भी इस्लामी आक्रमणकारी बाबर के आदेश से तोड़कर बाबरी मस्जिद का ढांचा खड़ा किया गया था, जिसमें खुदाई के उपरांत राम मंदिर के अवशेष बरामद हुए थे। साथ ही सर्वोच्च न्यायलय ने विवादित ढांचे को हटाकर मंदिर के पुनर्निर्माण की अनुमति दी थी।

हालंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद के अंदर किसी भी तरह के बदलाव या खुदाई पर रोक लगा दी थी। अब हाईकोर्ट ने बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई और लाइटिंग की अनुमति दी है, लेकिन शर्त यह है कि किसी भी संरचनात्मक हिस्से को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। मामला अभी अदालत में है और आगे की सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है।

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