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Monday, January 5, 2026
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बाढ़ से भारी नुकसान: जम्मू-श्रीनगर हाईवे तीसरे दिन भी ठप, तीन गुना समान खरीद रहें लोग!

हाईवे पर सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं, जिन्हें आश्रय और भोजन मुहैया कराने के लिए प्रशासन सक्रिय है।

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जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन और बाढ़ के कारण मंगलवार को लगातार तीसरे दिन भी बंद रहा। अधिकारियों के मुताबिक हाईवे की स्थिति बेहद गंभीर है और इसे पूरी तरह बहाल करने में कम से कम पांच दिन और लग सकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के इंजीनियरों ने बताया कि हाईवे 22 स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, और बहाव में आया 4 से 5 किलोमीटर लंबा हिस्सा पूरी तरह से बह गया है। वहीं डर के कारण घाटी में लोग तीन गुना से अधिक ईंधन और समान खरीद रहें है, जिससे 2 हफ्तों का स्टॉक ख़त्म होते जा रहा है।

रामबन जिले में रविवार (20 अप्रैल) को अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचा दी। मलबे में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई जबकि सौ से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हाईवे पर सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं, जिन्हें आश्रय और भोजन मुहैया कराने के लिए प्रशासन सक्रिय है।

केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन राहत कार्यों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि राहत कार्य ज़ोरों पर हैं और उन्होंने स्वयं बुधवार को रामबन जिला मुख्यालय पहुंचने की योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि “जिला प्रशासन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहा है। डीसी बसीर चौधरी स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद हैं और स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।”

बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने के प्रयास भी तेजी से जारी हैं। अब तक 1762 में से 1486 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DT) चालू हो चुके हैं और 98 में से 89 जलापूर्ति योजनाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं।

इस आपदा का जायजा लेने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी सोमवार को काली मोड़ पहुंचे। उन्होंने कहा कि “हालांकि यह आपदा स्थानीय है, लेकिन नुकसान बेहद व्यापक है। इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का कोई औचित्य नहीं बनता, फिर भी राज्य सरकार पूरी राहत और सहायता देगी।”पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है।

वहीं, घाटी में पेट्रोल और खाद्यान्न की संभावित कमी को लेकर नागरिकों में घबराहट है। डिविजनल कमिश्नर वीके बिधूड़ी ने लोगों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि “घाटी में दो हफ्ते तक चलने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।” बावजूद इसके, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। गांदरबल जिले के एक पंप कर्मचारी के मुताबिक, “लोग सामान्य से तीन गुना ज्यादा ईंधन खरीद रहे हैं, जिससे स्टॉक खत्म हो रहा है।”

मुगल रोड फिलहाल हल्के वाहनों के लिए एकतरफा यातायात हेतु खुला है, जो दक्षिण कश्मीर के शोपियां को जम्मू के राजौरी से जोड़ता है। हाईवे बंद होने से हवाई टिकटों की मांग भी अचानक बढ़ गई है, क्योंकि घाटी से बाहर निकलने वाले लोग अब विमान यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस आपदा ने न सिर्फ यातायात व्यवस्था को ठप किया है, बल्कि प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती भी पेश की है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राहत कार्य कितनी जल्दी प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में वापस ला पाते हैं।

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