23 C
Mumbai
Monday, January 12, 2026
होमन्यूज़ अपडेट"टर्की से सेब आयात पर लगे फौरन प्रतिबंध" जयराम ठाकुर की मांग

“टर्की से सेब आयात पर लगे फौरन प्रतिबंध” जयराम ठाकुर की मांग

Google News Follow

Related

भारत और टर्की के बीच तनावपूर्ण होते संबंधों के बीच अब आवाज़ें तेज़ हो गई हैं कि व्यापारिक समझौतों की समीक्षा हो और तुर्की के साथ कारोबारी रिश्ते खत्म किए जाएं। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शुक्रवार (16 मई)को मंडी में आयोजित तिरंगा यात्रा के बाद भारत सरकार से टर्की के साथ सभी प्रकार के व्यापारिक समझौते समाप्त करने की खुली मांग की। उन्होंने यह आरोप लगाया कि तुर्की ने हालिया भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान का खुला समर्थन किया और उसे ड्रोन व तकनीकी सहायता भी प्रदान की।

जयराम ठाकुर ने तुर्की के व्यवहार को “बर्दाश्त से बाहर” बताते हुए कहा, “जब तुर्किये में भूकंप से तबाही आई थी, तब भारत ने मानवीय आधार पर उनकी हरसंभव मदद की थी। लेकिन अब उनकी हरकतें हमारे देश के खिलाफ हैं। आज हर भारतवासी की यही भावना है कि टर्की के साथ सभी तरह के संबंध खत्म कर दिए जाएं। हिमाचल के लोगों की खासतौर पर यह मांग है कि तुर्की से आयात किए जाने वाले सेब पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए।”

ठाकुर ने टर्किश टूरिज्म पर भी सख्त टिप्पणी की और कहा कि भारतीयों को अब तुर्की घूमने की बजाय देश के पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ टर्की को आर्थिक सबक मिलेगा, बल्कि हिमाचल और अन्य राज्यों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

मंडी के पड्डल मैदान से सेरी मंच तक आयोजित तिरंगा यात्रा में भाजपा कार्यकर्ताओं, नेताओं और स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ स्कूलों के छात्रों ने भी हिस्सा लिया। यात्रा के दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे गूंजते रहे। छात्रों ने भारतीय सेना को सलाम किया और देशभक्ति के रंग में रचा-बसा दृश्य पेश किया।

वहीं, तुर्की से सेब आयात को लेकर अब ज़मीनी स्तर पर भी असंतोष उभरने लगा है। हिमालयी सेब उत्पादकों के संगठन हिमालयन एप्पल ग्रोअर्स सोसाइटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर टर्की से सेब आयात पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि तुर्की से सस्ते दामों पर आने वाले सेबों ने हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लाखों बागवानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है।

पत्र में यह भी कहा गया कि यह केवल किसानों की आजीविका का मसला नहीं, बल्कि हिमालयी राज्यों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से भी जुड़ा विषय है। ऐसे में केंद्र सरकार को नीतिगत रूप से तुर्की से सेब आयात पर पुनर्विचार करना चाहिए और घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देना चाहिए।

भारत-तुर्की संबंध अब केवल कूटनीति की बहस तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि देश की आंतरिक राजनीति, कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर भी अपना प्रभाव छोड़ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार अब इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी या बात सिर्फ नारों और बयानबाज़ी तक सीमित रह जाएगी।

यह भी पढ़ें:

‘राहुल गांधी ने कानून तोड़ा, उन्हें जेल भेजा जाए’ — दिलीप जायसवाल का तीखा हमला

अमेरिका से रिमिटेंस भेजने पर लगेगा टॅक्स, भारतीय श्रमिकों को लगेगा बड़ा झटका

न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की विदाई में नहीं पहुंचे SCBA के वकील, मुख्य न्यायधीश नाराज़!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,454फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
286,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें