राजपाल यादव को हाईकोर्ट से झटका: 6 करोड़ चुकाने के लिए और समय देने से इनकार

“ना का मतलब ना”

राजपाल यादव को हाईकोर्ट से झटका: 6 करोड़ चुकाने के लिए और समय देने से इनकार

High Court gives Rajpal Yadav a setback: Refuses to grant more time to repay Rs 6 crore

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। चेक बाउंस मामले में बकाया राशि चुकाने के लिए अतिरिक्त समय मांगने की उनकी याचिका को अदालत ने सख्ती से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “ना का मतलब ना। मैं आदेश सुरक्षित रख रहा हूं। मैं और समय नहीं दूंगा।”

दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान अभिनेता और उनके वकीलों के बार-बार बदलते रुख पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा, “कभी यह मत समझिए कि जज कमजोर है अगर जज आपके साथ अच्छा व्यवहार कर रहा है।”

अदालत ने दिखाई सख्ती

सुनवाई के दौरान अदालत ने विरोधाभासी दलीलों पर सवाल उठाते हुए कहा, “आप कह रहे हैं कि आप भुगतान करने को तैयार हैं, लेकिन आपके वकील कह रहे हैं कि आप जेल जा चुके हैं, इसलिए भुगतान नहीं करेंगे। अगर आप भुगतान करना चाहते हैं तो फिर मैं यह मामला क्यों सुन रहा हूं? भुगतान कीजिए।” राजपाल यादव ने अदालत से 6 करोड़ रुपये चुकाने के लिए 30 दिन का समय मांगा था, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया।

यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें धारा 138 (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) के तहत चेक बाउंस का आरोप लगाया गया है।

मई 2024 में सत्र अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए 6 महीने की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने उनकी सजा इस शर्त पर स्थगित कर दी थी कि वे बकाया राशि का भुगतान करेंगे और मामला सुलझा लिया जाएगा। इसके बाद केस को दिल्ली हाईकोर्ट मेडिएशन सेंटर भेजा गया।

बार-बार वादाखिलाफी पर कोर्ट सख्त:

अदालत ने पाया कि कई बार आश्वासन देने के बावजूद राजपाल यादव तय रकम जमा करने में विफल रहे। उन्होंने 2.5 करोड़ रुपये किस्तों में देने का वादा किया था, लेकिन उसका पालन नहीं किया।

फरवरी 2026 में गैर-अनुपालन के चलते अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 5 फरवरी को उन्होंने आत्मसमर्पण किया। हालांकि, 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम राहत मिली।

शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने दलील दी कि सजा पूरी करने से आर्थिक देनदारी खत्म नहीं होती। उन्होंने बताया कि राजपाल यादव ने खुद माना है कि करीब 10 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। उनके मुताबिक, ट्रायल कोर्ट से पहले करीब 2 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी भी लगभग 7.75 करोड़ रुपये बकाया हैं।

समझौते की कोशिश भी नाकाम:

अदालत ने एकमुश्त समझौते की संभावना भी तलाशी और संकेत दिया कि अगर 6 करोड़ रुपये जल्द चुका दिए जाएं तो विवाद खत्म हो सकता है। शिकायतकर्ता भी इस पर विचार करने को तैयार था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने भुगतान करने की इच्छा जताई और आर्थिक नुकसान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पांच फ्लैट बेच दिए हैं।

इसके बावजूद जब उन्होंने 30 दिन का समय मांगा, तो अदालत ने साफ इनकार कर दिया। फिलहाल, मामले में कोई समझौता नहीं हो सका है और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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