नकली दवाओं का बड़ा गिरोह पकड़ा गया; दो राज्यों में फैले नेटवर्क का पर्दाफाश

नकली दवाओं का बड़ा गिरोह पकड़ा गया; दो राज्यों में फैले नेटवर्क का पर्दाफाश

A large gang involved in the production of counterfeit medicines has been apprehended; a network spread across two states has been busted.

गाजियाबाद पुलिस ने नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए करीब 50,000 जाली टैबलेट बरामद की हैं। यह कार्रवाई हिमालयन कंपनी की शिकायत के बाद की गई, जिसमें उसकी लोकप्रिय दवा Liv.52 के नकली संस्करण बाजार में बेचे जाने की सूचना दी गई थी। पुलिस अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

यह शिकायत 3 जनवरी को प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नकली उत्पाद तैयार कर स्थानीय दुकानों तक सप्लाई किए जा रहे हैं। शिकायत मिलते ही पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की और सप्लाई चेन को खंगालने के लिए तकनीकी व जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज की।

गाजियाबाद के डीसीपी सुरेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार, कंपनी द्वारा दी गई जानकारी में आरोप लगाया गया था कि नकली सामान मुरादनगर से सप्लाई किया जा रहा था और अलीगढ़ में वितरित किया जा रहा था। इस इनपुट के आधार पर मुरादनगर थाने में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।

पूछताछ में पुलिस को रैकेट के काम करने के तरीके की अहम जानकारी मिली। जांचकर्ताओं के मुताबिक, नकली टैबलेट पर मुनाफा असामान्य रूप से ज्यादा था, जबकि निर्माण प्रक्रिया हरियाणा और उत्तर प्रदेश दो राज्यों में फैली होने के कारण लागत कम रहती थी। आरोपियों ने कबूल किया कि नकली Liv.52 टैबलेट हरियाणा की एक कंपनी में बनाई जाती थीं, जबकि रैपर और डिब्बों सहित पैकेजिंग सामग्री मेरठ से मंगाई जाती थी।

गाजियाबाद पुलिस ने इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस अधिकारी के पीछे खड़े चारों आरोपी हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे थे और चंद पैसों के लालच में कई जिंदगियों को खतरे में डाल रहे थे।

पुलिस के मुताबिक नकली दवाओं के इस नेटवर्क से जुड़े दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में नकली दवाओं का कारोबार फैलाने की योजना बना रहे थे। इतना ही नहीं, ये लोग कुछ कॉल सेंटर्स के संपर्क में भी थे, ताकि इस अवैध धंधे को विदेशों तक फैलाया जा सके।

आरोपियों ने बताया कि नकली दवा का एक डिब्बा तैयार करने में 35 से 40 रुपये का खर्च आता था। इन डिब्बों को बाजार में 110 से 115 रुपये में सप्लाई किया जाता था। तुलना करें तो असली उत्पाद का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 280 रुपये प्रति डिब्बा है। पुलिस का कहना है कि इसी बड़े मूल्य अंतर की वजह से आरोपी दुकानदारों को अधिक मुनाफे का लालच देकर नकली उत्पाद आसानी से बाजार में खपा रहे थे।

FIR दर्ज होने के बाद मुरादनगर पुलिस ने SWAT टीम की सहायता से तकनीकी जांच शुरू की। कॉल डिटेल, सप्लाई रूट और संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल के दौरान कई संदिग्धों की पहचान हुई, जिन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ में उन्होंने इस अवैध कारोबार में अपनी भूमिका स्वीकार की।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने लगभग 50,000 नकली टैबलेट जब्त कीं। डीसीपी तिवारी ने कहा, “हमारी जांच जारी है और हम इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रहे हैं। ऑपरेशन के हर पहलू की जांच की जा रही है और आगे उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस का कहना है कि इस मामले में स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर खतरा सामने आया है और नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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