प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 581.65 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। एजेंसी ने गुरुवार (12 मार्च)को जारी अपने आदेश में बताया कि यह कार्रवाई अनिल अंबानी की कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े जांच के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार इस कार्रवाई के तहत कुल 31 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। इनमें देश के कई राज्यों में स्थित जमीन के भूखंड शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि ये संपत्तियां गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्थित हैं।
यह कार्रवाई 6 मार्च को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े एक अलग मामले में की गई छापेमारी के बाद सामने आई है। जांच के दौरान ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) और FEMA के तहत कई ठिकानों पर तलाशी ली थी।
तलाशी अभियान के दौरान एजेंसी ने 2.48 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी फ्रीज की हैं। इनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और नकद राशि शामिल है। इसके अलावा FEMA की धारा 37A के तहत रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 13 बैंक खातों में मौजूद 77.86 करोड़ रुपये की राशि भी जब्त की गई है।
ईडी ने बताया कि इससे पहले भी RCFL, RHFL और रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में लगभग 15,729 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़े मामलों में कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य बढ़कर लगभग 16,310 करोड़ रुपये हो गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार RHFL और RCFL ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सार्वजनिक धन के रूप में बड़ी रकम जुटाई थी। इसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) में बदल गई।
ED has provisionally attached 31 immovable properties in the form of land parcels situated in Goa, Kerala, Karnataka, Punjab, Tamil Nadu, Uttar Pradesh, Haryana, Jharkhand, Maharashtra, Delhi, West Bengal, Andhra Pradesh and Rajasthan worth Rs. 581.65 Crore in the case of… pic.twitter.com/vem4kd0U65
— ED (@dir_ed) March 12, 2026
ईडी की जांच जुलाई 2025 में शुरू हुई थी। यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी। इन FIR में भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे, साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामले दर्ज किए गए थे। ये शिकायतें यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा दर्ज कराई गई थीं।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि जुटाए गए धन को समूह की विभिन्न कंपनियों में स्थानांतरित किया गया, जिनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल शामिल है। इसके लिए कई शेल या डमी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिनकी वित्तीय क्षमता बेहद सीमित थी और जिनका कोई महत्वपूर्ण व्यावसायिक संचालन नहीं था। ईडी ने कहा है कि कुर्क की गई संपत्तियां कथित अपराध से प्राप्त आय का प्रतिनिधित्व करती हैं। एजेंसी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।
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