भारत और अमेरिका ने रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हवाई में 29वीं आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता आयोजित की। यह बैठक दोनों देशों के बीच लगातार विस्तार पा रहे सैन्य और रणनीतिक संबंधों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने साझा सुरक्षा हितों, सैन्य सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इस उच्चस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय सेना के उप सेनाध्यक्ष (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई और अमेरिकी सेना के प्रशांत कमान के उप कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल वोवेल ने की। दोनों अधिकारियों ने सैन्य सहयोग को और व्यापक बनाने तथा भविष्य की रणनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों पर चर्चा की।
भारतीय सेना द्वारा सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, वार्ता का मुख्य फोकस दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने, पेशेवर आदान-प्रदान को विस्तार देने और सैन्य सहयोग को और गहरा करने पर रहा। चर्चा के दौरान ऐसे तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया, जिनसे दोनों देशों की सेनाएं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच सेना-से-सेना सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग और विभिन्न स्तरों पर पेशेवर आदान-प्रदान शामिल हैं। दोनों देशों ने इन पहलों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
हवाई में हुई यह वार्ता ऐसे समय में आयोजित हुई है जब भारत और अमेरिका कई क्षेत्रों में अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत कर रहे हैं। हाल ही में सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी कांग्रेस सदस्य पैट हैरिगन से मुलाकात की थी। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग के विस्तार और इंडो-पैसिफिक में साझा रणनीतिक हितों पर चर्चा हुई थी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुई बातचीत ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती को फिर से रेखांकित किया। यह मुलाकात उन कई उच्चस्तरीय बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा थी, जिनमें रक्षा सचिव ने न्यूजीलैंड, सिंगापुर, स्वीडन और नीदरलैंड के नेताओं के साथ भी सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की थी।
पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दोनों देश इंटरऑपरेबिलिटी, संयुक्त संचालन क्षमता और रक्षा उत्पादन में साझेदारी को विशेष महत्व दे रहे हैं। भारत-अमेरिका इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (iCET) के तहत सह-उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त विकास परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
अमेरिका ने लगातार भारत के रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का समर्थन करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें रक्षा तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग जैसी पहलें शामिल हैं। ये प्रयास भारत की घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने और सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लक्ष्य के अनुरूप हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हवाई में हुई 29वीं स्टाफ वार्ता ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि दोनों देश रक्षा सहयोग, सैन्य समन्वय और साझा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता रखते हैं।
यह बैठक न केवल मौजूदा सहयोग की समीक्षा का मंच बनी, बल्कि भविष्य में सैन्य साझेदारी, पेशेवर आदान-प्रदान और रणनीतिक समन्वय के नए रास्ते तलाशने का अवसर भी साबित हुई। इससे स्पष्ट है कि नई दिल्ली और वाशिंगटन अपने रक्षा संबंधों को और गहरा करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
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