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Wednesday, October 28, 2026
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जीएसटी 2.0 लागू: क्या सस्ता और क्या हुआ महंगा?

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भारत के कर ढांचे में आज से एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। लंबे इंतजार के बाद जीएसटी 2.0 पूरे देश में प्रभावी हो गया है। सरकार का दावा है कि यह नया सिस्टम न सिर्फ टैक्स प्रक्रिया को आसान बनाएगा, बल्कि आम नागरिकों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम करेगा। नवरात्रि के मौके पर इसे “जीएसटी बचत उत्सव” के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, ताकि घरेलू और स्वदेशी उत्पादों की खपत बढ़े।

रोजमर्रा की चीजें हुईं सस्ती

नई व्यवस्था के तहत कई जरूरी सामान और सेवाओं को शून्य कर श्रेणी में डाल दिया गया है। अब पनीर, छेना (प्री-पैकेज्ड), दूध, रोटी, चपाती, पराठा, ब्रेड, जीवन रक्षक 33 प्रकार की दवाएं, स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और शैक्षिक सेवाओं (ट्यूशन, कोचिंग) पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा। पहले इन पर 5 से 18 प्रतिशत तक टैक्स वसूला जाता था।

स्टेशनरी जैसे शार्पनर, नोटबुक, कॉपी, पेंसिल आदि भी अब टैक्स फ्री हो गए हैं। इसके अलावा वोकेशनल ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट कोर्स, चैरिटेबल अस्पताल और शिक्षा संबंधी ट्रस्ट की सेवाएं भी शून्य टैक्स के दायरे में आ गई हैं। मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन पर भी टैक्स पूरी तरह हटा दिया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और गाड़ियों पर राहत

एसी और फ्रिज जैसी वस्तुओं पर अब 28 प्रतिशत के बजाय 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। वाहन सेक्टर में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। 350 सीसी तक की बाइक पर टैक्स घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। इसी तरह, 1,200 सीसी तक की पेट्रोल कारें और 1,500 सीसी तक की डीजल कारें, जिनकी लंबाई 4 मीटर से कम है, अब 18 प्रतिशत स्लैब में आ गई हैं। पहले इन पर 28 प्रतिशत तक कर लगाया जाता था।

हालांकि, बड़ी गाड़ियों और लग्जरी सेगमेंट के वाहनों पर टैक्स घटकर 40 प्रतिशत किया गया है, जबकि पहले यह करीब 50 प्रतिशत था।

तंबाकू, बीड़ी और पान मसाला जैसे उत्पादों पर टैक्स 40 प्रतिशत ही रहेगा। वहीं, पेट्रोल और डीजल को अभी भी जीएसटी के दायरे में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उनकी कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार का मानना है कि जीएसटी 2.0 से आम आदमी को सीधी राहत मिलेगी और बाजार में खपत बढ़ेगी। रोजमर्रा के सामान सस्ते होने से जहां उपभोक्ताओं को फायदा होगा, वहीं वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, राजस्व संतुलन और राज्यों के हिस्से को लेकर आने वाले महीनों में इस नए टैक्स ढांचे की असली परीक्षा होगी।

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