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अंतरिक्ष में निगरानी बढ़ाएगा भारत: उत्तर-पूर्व में नया रडार और लद्दाख में टेलीस्कोप स्थापित करेगा ISRO

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भारत अपनी अंतरिक्ष निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) पृथ्वी की कक्षा में मौजूद चीजों की निगरानी के लिए अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। इसके तहत उत्तर-पूर्व भारत में एक अत्याधुनिक फेज्ड एरे रडार स्थापित करने और लद्दाख के हनले क्षेत्र में एक ऑप्टिकल टेलीस्कोप लगाने की योजना बनाई गई है।

इस निगरानी व्यवस्था के पिछे अंतरिक्ष के मलबे से सैटेलाइट्स का बचाव करने की योजना बताई जा रही है। पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) लगभग 500 से 1000 किलोमीटर के बीच स्थित है, यह उपग्रहों और अंतरिक्ष के मलबे से तेजी से भरती जा रही है। इससे टकराव का खतरा बढ़ गया है, जो अंतरिक्ष अभियानों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इस खतरे को देखते हुए स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA) को मजबूत करना बेहद जरूरी हो चूका है।

वर्तमान में ISRO श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में मल्टी-ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग रडार (MOTR) संचालित करता है। यह एल-बैंड एक्टिव फेज्ड एरे रडार एक साथ कई वस्तुओं को ट्रैक करने में सक्षम है। इसकी क्षमता 0.25 वर्ग मीटर के रडार क्रॉस सेक्शन वाले ऑब्जेक्ट्स को 1000 किलोमीटर तक की दूरी पर ट्रैक करने की है। यह रडार भारतीय रॉकेट्स और उपग्रहों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उत्तर-पूर्व में स्थापित होने वाला नया रडार पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगा। इसकी डिजाइन और समीक्षा 2025 में एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति द्वारा पूरी की जा चुकी है। वहीं, लद्दाख के हनले में स्थापित किया जा रहा ऑप्टिकल टेलीस्कोप ऊंचाई और साफ आसमान के कारण बेहतर अवलोकन के लिए उपयुक्त स्थान पर लगाया जा रहा है। यह टेलीस्कोप रात के समय सूर्य के प्रकाश के परावर्तन के जरिए उपग्रहों और अन्य अंतरिक्ष वस्तुओं का पता लगाने में मदद करेगा।

इसके अलावा, नैनीताल स्थित बेकर नन श्मिट टेलीस्कोप (BNST) का भी पुनरुद्धार किया जा रहा है, जो संचालन में आने के बाद निगरानी क्षमताओं को और सुदृढ़ करेगा। रडार और ऑप्टिकल टेलीस्कोप का यह संयोजन दिन-रात और विभिन्न ऊंचाइयों पर मौजूद वस्तुओं की निगरानी में सहायक होगा।

SSA के तहत उपग्रहों और अंतरिक्ष मलबे की स्थिति का पता लगाना, उनकी निगरानी करना और संभावित जोखिमों का पूर्वानुमान लगाना शामिल है। इसके लिए जमीनी सेंसर और टेलीस्कोप से प्राप्त डेटा का उपयोग किया जाता है। ISRO इस पहल के तहत भारत के अंतरिक्ष संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन और कक्षा में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयासों में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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