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Monday, February 12, 2024
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भारत की बड़ी राजनैतिक सफलता

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प्रशांत कारुलकर

भारत और कतर के बीच बड़ा समझौता हुआ है। भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने कतर में स्थित कतरएनर्जी के साथ मिलकर अगले 20 वर्षों तक प्रतिवर्ष 7.5 मिलियन टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात करने का समझौता किया है। इस समझौते की कुल राशि 78 अरब डॉलर है, जो इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा एलएनजी आयात समझौता बनाता है। इस समझोते से भारत को 600 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।

लेकिन भारत के लिए इस समझौते की असली खुशखबरी ये है कि उसे मौजूदा दरों से कम दाम पर गैस मिलने वाली है। अनुमान है कि इस समझौते से भारत को अगले 20 वर्षों में छह अरब डॉलर का लाभ होगा। यह एक ऐसा आकर्षक सौदा है जिसने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत बना दिया है।

भारत के लिए फायदे:

कम कीमत पर एलएनजी: मौजूदा दामों से कम पर गैस मिलने से बिजली उत्पादन, उर्वरक उत्पादन और सीएनजी में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की लागत कम होगी। इससे उत्पादन सस्ता होगा और उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा: कतर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक है और इसे एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता माना जाता है। इस समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी मजबूत होगी।

आर्थिक विकास: सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति से देश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

रणनीतिक संबंध: यह समझौता भारत और कतर के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। दोनों देश न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि, रक्षा, सुरक्षा और व्यापार जैसे अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा सकते हैं।

भारत और कतर के बीच हुए ऐतिहासिक एलपीजी समझौते और 8 पूर्व सैनिकों की रिहाई के बीच सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है, हालाँकि कुछ लोग इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देख रहे हैं। ८ में से ७ अधिकारी आज भारत पहुंच गये है। उनकी रिहाई को भारत की बड़ी राजनैतिक विजय के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते की शर्तों के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए भविष्य में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं। लेकिन कुल मिलाकर, यह समझौता भारत के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है।

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