भारत की डीप-टेक कंपनी QNu Labs ने 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क का सफल प्रदर्शन कर रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी अब भारतीय सशस्त्र बलों के लिए इससे भी अधिक दूरी वाले ऑपरेशनल नेटवर्क विकसित करने की तैयारी में है।
यह उपलब्धि भारत की नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) के तहत हासिल की गई है, जिसका लक्ष्य अगले आठ वर्षों में 2,000 किलोमीटर लंबा क्वांटम नेटवर्क स्थापित करना है। QNu Labs इस लक्ष्य का आधा हिस्सा पहले ही तय समय से पहले हासिल कर चुका है, जो देश की क्वांटम तकनीक में तेजी से हो रही प्रगति को दर्शाता है।
कंपनी ने स्वदेशी क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) सिस्टम विकसित किया है, जो पारंपरिक गणितीय एन्क्रिप्शन के बजाय क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों पर आधारित है। इस तकनीक की खासियत यह है कि यदि कोई संचार को इंटरसेप्ट करने की कोशिश करता है, तो उसके संकेत तुरंत पकड़ में आ जाते हैं, जिससे डेटा को हैक करना लगभग असंभव हो जाता है।
QNu Labs के प्रमुख उत्पादों में ‘Armos’ (QKD सिस्टम) और ‘Tropos’ (क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर) शामिल हैं, जो डेटा ट्रांसमिशन के दौरान उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से सैन्य उपयोग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कंपनी के सीईओ सुनील गुप्ता ने बताया कि भारतीय सेना और नौसेना के लिए इस नेटवर्क का उपयोग शुरू हो चुका है और भविष्य में इससे भी बड़े नेटवर्क तैनात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी अब केवल परीक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक संचालन (लाइव एनवायरनमेंट) में इस तकनीक को लागू कर रही है।
यह नेटवर्क फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है, जिसमें क्वांटम-सुरक्षित नोड्स को जोड़ा गया है, जिससे विभिन्न शहरों के बीच सुरक्षित संचार संभव हो पाया है। यह पारंपरिक एन्क्रिप्शन से अलग है, जिसे भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर ही तोड़ सकते हैं, जबकि क्वांटम कम्युनिकेशन में एन्क्रिप्शन की चाबियां (keys) पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक “harvest now, decrypt later” जैसे साइबर खतरों से निपटने में बेहद अहम है, जहां डेटा को अभी चुरा कर भविष्य में डिक्रिप्ट किया जा सकता है।
रक्षा क्षेत्र के अलावा बैंकिंग और कॉरपोरेट सेक्टर में भी क्वांटम-सुरक्षित नेटवर्क की मांग बढ़ रही है। QNu Labs ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करते हुए मैसाचुसेट्स में अपनी सहायक कंपनी भी स्थापित की है। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करती है, जो लंबी दूरी के क्वांटम नेटवर्क विकसित करने में सक्षम हैं। साथ ही, यह आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूती देने और सुरक्षित संचार के क्षेत्र में रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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