वृश्चिकासन दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘वृश्चिक’ का अर्थ है ‘बिच्छू’ और ‘आसन’ का अर्थ है ‘मुद्रा’। इस आसन को करने के दौरान शरीर की मुद्रा बिच्छू के समान दिखाई देती है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन को एक उन्नत स्तर का योग आसन बताया है। इसके नियमित रूप से करने से शरीर में शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का अद्भभुत संयोजन है। इस आसन में शरीर की आकृति डंक उठाए हुए बिच्छू की तरह हो जाती है।
अगर इस आसन को सही तरीके से किया जाए तो मस्तिष्क में रक्त संचार सुधरता है, जिससे स्मरण शक्ति और फोकस बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आसन हृदय के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि इनवर्टेड पोजिशन में रक्त प्रवाह संतुलित होता है।
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले मयूरासन की स्थिति में आएं। कोहनियों को कंधों के नीचे रखें और हथेलियों से जमीन को पकड़ें। शरीर को ऊपर उठाते हुए पैरों को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे रीढ़ को झुकाते हुए पैरों को सिर की ओर लाएं, ताकि पैरों की उंगलियां सिर को छूने की कोशिश करें। संतुलन बनाए रखें और गहरी सांस लें।
यह एक अत्यंत कठिन आसन है। इसे केवल तभी करने का प्रयास करना चाहिए जब आप पिंचा मयूरासन में निपुण हों। उच्च रक्तचाप, रीढ़ की हड्डी में चोट, या हृदय संबंधी समस्याओं वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।
टेस्ला ने भारत में छह सीटों वाली मॉडल वाई एल लॉन्च, डिलीवरी जून में शुरू होगी!



