आईटी शेयरों में 3% की मजबूत गिरावट; क्यों हो रही बिकवाली

अमेरिकी टेक शेयरों में कमजोरी, एआई से जुड़ी चिंताएं और ऊंची ब्याज दरों की आशंका से निवेशकों का भरोसा डगमगाया

आईटी शेयरों में 3% की मजबूत गिरावट; क्यों हो रही बिकवाली

Sharp 3% drop in IT stocks; why the sell-off?

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार (11 जून) को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी नई चिंताओं और अमेरिका में लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंकाओं ने निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला है।

सुबह करीब 9:50 बजे निफ्टी IT इंडेक्स 2.67 प्रतिशत गिरकर 27,525.80 पर पहुंच गया और यह दलाल स्ट्रीट का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया। आईटी शेयरों में गिरावट का असर सेंसेक्स पर भी दिखाई दिया, जहां प्रमुख टेक कंपनियां सबसे बड़े नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहीं।

सेंसेक्स में एचसीएल टेक्नोलॉजीज सबसे अधिक 2.85 प्रतिशत टूटा। इसके बाद इन्फोसिस में 2.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। टेक महिंद्रा 1.65 प्रतिशत और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 1.48 प्रतिशत नीचे फिसल गए।

अन्य आईटी कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर (ओएफएसएस) में 3.75 प्रतिशत, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 2.84 प्रतिशत, कोफोर्ज में 2.76 प्रतिशत, एलटीआईमाइंडट्री में लगभग 2.7 प्रतिशत, एमफैसिस में 2.56 प्रतिशत और विप्रो में 1.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली का असर

भारतीय आईटी शेयरों में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी टेक कंपनियों में आई कमजोरी रही। बुधवार को वॉल स्ट्रीट में पिछले कई हफ्तों की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई और टेक-प्रधान नैस्डैक कंपोजिट सूचकांक लगभग 2 प्रतिशत टूट गया।

एआई से जुड़ी कंपनियों में मुनाफावसूली के चलते यह गिरावट शुरू हुई। एआई चिप निर्माता एनवीडिया का शेयर 3.7 प्रतिशत और ब्रॉडकॉम का शेयर 5.1 प्रतिशत गिर गया, जिसके बाद पूरे प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बिकवाली का माहौल बन गया। इसका असर एशियाई बाजारों और भारतीय आईटी कंपनियों पर भी देखने को मिला।

एआई से पारंपरिक आईटी सेवाओं पर खतरे की चिंता

बाजार में यह चिंता भी दोबारा उभरकर सामने आई है कि एआई आधारित ऑटोमेशन पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग को प्रभावित कर सकता है। हालांकि एआई ने नए कारोबारी अवसर पैदा किए हैं, लेकिन निवेशकों को डर है कि उत्पादकता बढ़ने के साथ कई पारंपरिक सेवाओं की आवश्यकता कम हो सकती है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई से उत्पन्न मूल्य दबाव अगले छह से आठ तिमाहियों तक आईटी सेवा कंपनियों की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि सेक्टर का मूल्यांकन भविष्य में 13-14 गुना प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात तक आ सकता है।

महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता

अमेरिका में मई महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों का उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

ऊंची महंगाई के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें रहने से टेक और ग्रोथ कंपनियों के मूल्यांकन पर दबाव पड़ता है, क्योंकि इन कंपनियों की कीमतें भविष्य की संभावित आय पर अधिक निर्भर होती हैं।

निवेशकों की नजर अमेरिका पर

भारतीय आईटी कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है। ऐसे में अमेरिका की आर्थिक स्थिति, तकनीकी खर्च में सुस्ती और ग्राहकों के बजट को लेकर अनिश्चितता निवेशकों के लिए प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई है।

ताजा गिरावट से साफ है कि आईटी सेक्टर अभी भी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और बाजार यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले समय में इस उद्योग के लिए अवसर साबित होगी या पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल के लिए चुनौती।

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