अमेरिका के वित्तीय आंकड़ों में एक असामान्य स्थिति सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लगाए गए शुल्कों (टैरिफ) से मई महीने में प्राप्त राजस्व लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ko आयातकों को करीब 22 अरब डॉलर की वापसी करनी पड़ी है।
ट्रेजरी विभाग के अनुसार, मई में जितनी राशि टैरिफ के रूप में एकत्र की गई थी, लगभग उतनी ही रकम आयातकों को लौटा दी गई। इसके परिणामस्वरूप शुद्ध सीमा शुल्क राजस्व लगभग 4.2 करोड़ डॉलर के नकारात्मक स्तर पर पहुंच गया। वर्ष 2015 से उपलब्ध आंकड़ों में यह पहली बार है जब अमेरिकी सीमा शुल्क आय नकारात्मक दर्ज की गई है।
बता दें की अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत टैरिफ लगाने को अधिकारों का अतिक्रमण करार किया था। अदालत के फैसले के बाद प्रशासन ने विवादित शुल्क का भुगतान करने वाली कंपनियों को धनवापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी।
हालांकि भविष्य में कुल कितनी राशि वापस करनी होगी, इस पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। प्रशासन ने उस न्यायिक आदेश के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें आईईईपीए के तहत एकत्र किए गए लगभग 166 अरब डॉलर के सभी शुल्क आयातकों को लौटाने की बात कही गई थी।
पिछले सप्ताह कांग्रेस की सुनवाई के दौरान अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने सांसदों से कहा था कि जिन कंपनियों ने ये शुल्क अदा किए हैं, उन्हें उनका पैसा वापस किया जाएगा। हालांकि संघीय एजेंसियों का कहना है कि अंतिम रूप से जमा किए गए शुल्कों को बिना स्पष्ट न्यायिक अनुमति के दोबारा खोलकर वापस नहीं किया जा सकता।
वित्त वर्ष 2025 के दौरान आयात शुल्क अमेरिकी सरकार के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरे थे। अक्टूबर में इनकी वसूली अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची थी, जिससे बजट घाटे को कम करने और बढ़ती उधारी लागत के बीच संघीय वित्त को अस्थायी राहत मिली थी।
मई में रिफंड जारी होने के बावजूद चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में अमेरिकी बजट घाटे में सुधार दर्ज किया गया। ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक घाटा घटकर 1.25 ट्रिलियन डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9 प्रतिशत कम है।
हालांकि बढ़ती ब्याज लागत अमेरिकी वित्त के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। केवल मई महीने में ही सरकार ने अपने कर्ज पर 133 अरब डॉलर का ब्याज चुकाया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 44 प्रतिशत अधिक है। इससे रिकॉर्ड स्तर के कर्ज का बोझ और स्पष्ट हो गया है।
कर संग्रह के मोर्चे पर मिश्रित तस्वीर देखने को मिली। व्यक्तिगत आयकर, सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर पेरोल टैक्स से प्राप्त राजस्व बढ़कर 286 अरब डॉलर हो गया, जबकि कॉर्पोरेट कर संग्रह में वर्ष 2025 की समान अवधि की तुलना में 67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत लगाए जाने वाले टैरिफ वर्ष 2026 में समान स्तर का राजस्व उत्पन्न कर सकते हैं, लेकिन इनमें से कई उपाय अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। इस बीच अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर जारी कानूनी चुनौतियों और बार-बार बदलती टैरिफ व्यवस्था के कारण कारोबारी जगत में अनिश्चितता बनी हुई है।
कांग्रेसनल बजट ऑफिस (सीबीओ) के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में अमेरिकी बजट घाटा बढ़कर 1.85 ट्रिलियन डॉलर और 2027 में 1.89 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। बढ़ते सरकारी खर्च और ऊंची ब्याज लागत इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।
ताजा रिफंड से यह संकेत मिला है कि ट्रंप की व्यापार नीतियों से जुड़े कानूनी विवाद अब सीधे अमेरिकी सरकारी वित्त पर असर डालने लगे हैं और आने वाले वर्षों में राजस्व के एक महत्वपूर्ण स्रोत पर दबाव बढ़ सकता है।
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