मणिपुर के लीलोन वैफेई गांव से 13 मई अपहरण के बाद लापता हुए नागा समुदाय के छह लोगों के शव बरामद किए गए हैं। सभी शवों को इंफाल के जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) के शवगृह में रखा गया है। लगभग 28 दिनों के बाद शव मिलने से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और आक्रोश का माहौल है। मृतकों के परिजनों और समुदाय के लोगों ने शवों की पहचान सुनिश्चित करने के साथ-साथ इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
लियांगमाई नागा काउंसिल मणिपुर के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामाई ने कहा कि सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मिले हुए शव उन्हीं छह लापता लोगों के हैं या नहीं। उन्होंने कहा, “सबसे पहले हमें शवों की स्थिति की जांच करनी होगी। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ये शव वास्तव में हमारे लापता हुए छह लोगों के ही हैं।” विजुनामाई ने आगे बताया कि शवों की पहचान और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पीड़ितों के परिवारों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा, “हमें पीड़ितों के परिवारों से चर्चा करनी होगी, उसके बाद ही अगला कदम उठाने का फैसला किया जाएगा।”
सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए विजुनामाई ने कहा कि शवों को इंफाल लाने में 28 दिन का समय लगना बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा, “हम संतुष्ट कैसे हो सकते हैं? शवों को यहाँ लाने में 28 दिन लग गए। सरकार ने जिस तरह से कार्रवाई की है, उससे हम बेहद निराश हैं। अब हम देखेंगे कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है।”
मणिपुर पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF) और असम राइफल्स के लगभग 450 जवानों ने खोजी कुत्तों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से करीब 24 घंटे तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। इस अभियान के दौरान छह शव बरामद किए गए। संदेह जताया जा रहा है कि ये शव उन्हीं व्यक्तियों के हैं जिन्हें 13 मई 2026 को लेइलोन वैफेई से बंधक बनाया गया था।
इस बीच, मणिपुर के पहाड़ी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव के चलते हुई हिंसा में तीन कुकी चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी, जबकि पांच अन्य लोग घायल हुए थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान अगवा किए गए लोगों में ये छह व्यक्ति भी शामिल थे।
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