1 करोड़ के इनामी नक्सल कमांडर समेत 10 नक्सली ढेर!

छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर बड़ी सफलता, 16 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में गुरुवार (11 सितंबर) को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई बड़ी मुठभेड़ में दस नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। मारे गए नक्सलियों में संगठन का बड़ा चेहरा और 1 करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष कमांडर मोडेम बालकृष्ण उर्फ मनोज भी शामिल है। यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर रायपुर से लगे जंगलों में हुई।

गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों की इस कामयाबी को ऐतिहासिक करार देते हुए जवानों के साहस की सराहना की। शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, “नक्सलियों के विरुद्ध हमारे सुरक्षा बलों ने आज एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ में CRPF की कोबरा कमांडो, छत्तीसगढ़ पुलिस और DRG ने जॉइंट ऑपरेशन चलाकर ₹1 करोड़ के इनामी सीसीएम मोडेम बालकृष्णा उर्फ मनोज सहित 10 कुख्यात नक्सलियों को मारा गिराया है। समय रहते बचे-खुचे नक्सली भी आत्मसमर्पण कर दें। आगामी 31 मार्च से पहले लाल आतंक का समूल नाश निश्चित है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी जवानों को बधाई दी और कहा कि यह अभियान नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ने में निर्णायक साबित होगा। सीएम साय ने यह भी जानकारी दी कि, नारायणपुर जिले में 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में जनताना सरकार सदस्य, पंचायत मिलिशिया डिप्टी कमांडर, पंचायत सरकार सदस्य और न्याय शाखा अध्यक्ष जैसे नक्सली कैडर शामिल हैं। उन्होंने कहा, “यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नक्सलियों की विचारधारा अब दम तोड़ रही है। हमें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत बनेगा।”
मुठभेड़ में हिस्सा लेने वाले दस्तों में CRPF की कोबरा कमांडो, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस की टीमें शामिल थीं। अभी पूरे अभियान का विस्तृत ब्योरा सामने आना बाकी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि मोडेम बालकृष्ण की मौत नक्सली संगठन के लिए करारा झटका है।
गरियाबंद लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा है। यहां सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच पहले भी कई बार मुठभेड़ें हो चुकी हैं। हाल के वर्षों में कई बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया है या गिरफ्तार किया गया है। बालकृष्ण पर हत्या, लूट और पुलिस पर हमले जैसे गंभीर आरोप थे। उसकी मौत से नक्सली संगठन की रणनीतिक क्षमता को गहरा आघात पहुंचने की संभावना है, क्योंकि वह कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था।
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