कर्नाटक में 20 लाख अवैध बांग्लादेशी?

हुबली में प्रदर्शन, खुफिया विभाग की रिपोर्ट का दावा

कर्नाटक में 20 लाख अवैध बांग्लादेशी?

20 lakh illegal Bangladeshis in Karnataka?

भारत के अन्य हिस्सों की तरह कर्नाटक भी कथित रूप से बढ़ती बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या का सामना कर रहा है। इसी सन्दर्भ में चिंताजनक रिपोर्ट सामने आयी है। 18 मई को विभिन्न हिंदू संगठनों ने हुबली के श्री सिद्धारूढ़ा रेलवे स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया और पश्चिम बंगाल तथा पूर्वी भारत से आने वाले लोगों की अधिक सख्ती से जांच करने की मांग की।

यह प्रदर्शन प्रमोद मुथालिक और श्री राम सेने के सदस्यों द्वारा आयोजित किया गया। हाल के दिनों में कई संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हुबली और दक्षिण भारत के अन्य शहरों में पहुंचने के बाद यह आंदोलन किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पश्चिम बंगाल में कार्रवाई तेज होने के बाद कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर रोजगार की तलाश में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों की ओर जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि फर्जी आधार कार्ड रखने वाले लोगों को पर्याप्त सत्यापन के बिना यात्रा करने की अनुमति दी जा रही है और रेलवे पुलिस केवल सतही जांच कर रही है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में पश्चिम बंगाल से आए लगभग 10 संदिग्ध व्यक्तियों को हुबली रेलवे स्टेशन पर पूछताछ के लिए रोका गया था। उन लोगों ने बताया कि वे बागलकोट जिले में मजदूरी के लिए जा रहे हैं। आधार कार्ड दिखाने के बाद उन्हें आगे जाने की अनुमति दे दी गई।

इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि फर्जी पहचान पत्र भी अवैध रूप से बनाए जा सकते हैं और केवल आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। प्रमोद मुतालिक ने कहा कि सिर्फ आधार कार्ड देखकर लोगों को जाने देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि विस्तृत जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अवैध घुसपैठिए कर्नाटक में स्थायी रूप से न बसें।

उन्होंने स्थानीय पुलिस, रेलवे अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की भी मांग की, ताकि प्रवासन के पैटर्न पर नजर रखी जा सके और राज्य में अवैध रूप से रहने वाले लोगों की पहचान की जा सके।

प्रदर्शन के बाद पुलिस और रेलवे कर्मचारियों ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से आने वाली शालीमार एक्सप्रेस के यात्रियों की जांच बढ़ा दी। हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि भारी यात्री संख्या और कर्मचारियों की कमी के कारण यह कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक बनकर रह गई है।

जनवरी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया विभाग के अनुमान में दावा किया गया था कि कर्नाटक में लगभग 20 लाख अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से 70 से 80 प्रतिशत लोगों के पास भारतीय पहचान दस्तावेज मौजूद हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 20 से 25 वर्षों से बांग्लादेशी घुसपैठिए पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में प्रवेश करते रहे हैं। वे आमतौर पर पहले पश्चिम बंगाल में कुछ वर्ष बिताते हैं और स्थानीय नेटवर्क की मदद से आधार कार्ड तथा मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में चले जाते हैं।

कुछ बांग्लादेशी नागरिक कथित रूप से पश्चिम बंगाल से सीधे बेंगलुरु पहुंचते हैं। बाद में वे रोजगार के लिए आसपास के क्षेत्रों में चले जाते हैं। अनुमान के अनुसार, बेंगलुरु और उसके ग्रामीण क्षेत्रों में 5 से 6 लाख, मलनाड और करावली क्षेत्र में 8 से 10 लाख तथा पूरे कर्नाटक में लगभग 20 लाख बांग्लादेशी रह रहे हो सकते हैं। पुलिस सूत्रों का दावा है कि इनमें से कई लोगों ने भारतीय दस्तावेज प्राप्त कर लिए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के निवासी होने का दावा करने वाले कुछ लोग बेंगलुरु, बेंगलुरु ग्रामीण और मलनाड क्षेत्रों में निर्माण स्थलों, सुपारी बागानों, कॉफी एस्टेटों और कबाड़ के कारोबार में कम मजदूरी पर काम कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय श्रमिकों की तुलना में 100 से 150 रुपये कम मजदूरी स्वीकार करने के कारण कुछ नियोक्ता उन्हें प्राथमिकता देते हैं।

राज्य में रहने वाले अधिकांश कथित बांग्लादेशी बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में कचरा संग्रहण, निर्माण कार्य, सैलून, अस्पतालों में सफाई सेवाओं, होटल-रेस्तरां और फुटपाथ पर सामान बेचने जैसे कार्यों में लगे हुए बताए जाते हैं।

इसी तरह, वे चिक्कमगलुरु, उडुपी, शिवमोग्गा, कोडागु, दक्षिण कन्नड़ और उत्तर कन्नड़ जिलों में सुपारी और कॉफी बागानों, रिसॉर्ट्स, एस्टेट्स तथा फार्महाउसों में भी कार्यरत बताए जाते हैं। कुछ मामलों में उनके परिवारों के साथ रहने की भी बात कही गई है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि तटीय और मलनाड क्षेत्रों में पिछले 15 वर्षों से रह रहे कुछ अवैध प्रवासियों ने भारतीय पहचान दस्तावेज प्राप्त करने के अलावा विभिन्न राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी उठाया है। साथ ही, उनके द्वारा संपत्तियां खरीदने और भारतीय पहचान के आधार पर पासपोर्ट हासिल कर बाद में अन्य देशों में जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

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