पटना में भाजपा नेता गोपाल खेमका की हत्या, छह साल पहले बेटे की भी हुई थी हत्या!

बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या...

पटना में भाजपा नेता गोपाल खेमका की हत्या, छह साल पहले बेटे की भी हुई थी हत्या!

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बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान इलाके में शुक्रवार(4 जुलाई) देर रात अज्ञात बाइक सवार हमलावर ने भाजपा नेता और जाने-माने व्यवसायी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी। यह हत्या छह साल पहले उनके बेटे गुंजन खेमका की हत्या की याद दिलाती है, जिनकी दिसंबर 2018 में इसी तरह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पुलिस के अनुसार, खेमका रात करीब 11 बजे बैंकिपुर क्लब से अपने रामगुलाम चौक स्थित आवास लौटे थे। जैसे ही वह अपनी गाड़ी से उतरे, एक हमलावर ने नजदीक से गोली चलाई और बाइक सवार हमलावर घटनास्थल से फरार हो गया। उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद बिहार के डीजीपी बिनय कुमार ने पटना पुलिस को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) से सहयोग लेने के निर्देश दिए हैं।

पटना सिटी एसपी के मुताबिक, “हमलावरों ने 9 एमएम बोर की कई गोलियां चलाईं, जब खेमका गाड़ी के अंदर ही थे। हत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। हत्यारे की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।”

गौरतलब है कि गोपाल खेमका के बेटे गुंजन खेमका जी.के. कॉटन मिल के मालिक थे उन्हें 20 दिसंबर 2018 को बिहार के हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में उनकी फैक्ट्री गेट के पास बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस केस में भी अब तक न्याय अधूरा है।

इस हत्याकांड को लेकर बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) ने घटना स्थल पर पहुंचकर नीतीश सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “बिहार अपराधियों का अड्डा बन चुका है! नीतीश जी, बिहार को बख्श दीजिए।”

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, “सात साल पहले गुंजन खेमका की हत्या हुई थी। मैंने तब जाकर परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया था। अगर सरकार ने उस समय सख्ती दिखाई होती, तो आज गोपाल खेमका की हत्या नहीं होती।”

पुलिस अब उन बिंदुओं पर जांच कर रही है कि क्या गोपाल खेमका की हत्या उनके बेटे की हत्या से जुड़ी हो सकती है, या किसी कारोबारी रंजिश का परिणाम है। दो हत्याएं—एक ही परिवार में, लगभग एक जैसे तरीके से—बिहार की सुरक्षा व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है। SIT के अलावा CID और STF की टीमें सक्रिय हैं, लेकिन शहर में दहशत का माहौल है।

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