28.3 C
Mumbai
Saturday, July 18, 2026
होमक्राईमनामाहिंदुओ के खिलाफ दंगों के 7 मामलों सहित 52 अपराधिक मामलों को...

हिंदुओ के खिलाफ दंगों के 7 मामलों सहित 52 अपराधिक मामलों को वापस लेगी कांग्रेस सरकार

2022 में दरगाह परिसर में हिंदुओं और पुलिस हमले से जुड़े मामलों की वापसी पर विवाद, हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी

Google News Follow

Related

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्यभर में दर्ज 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इन मामलों में वर्ष 2022 में कलबुर्गी जिले के आलंद स्थित लाडले माश्ताक दरगाह परिसर में हुई हिंदुओ पर हुई हिंसा से जुड़े 7 मामले भी शामिल हैं। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस अपने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए हिंदू पीड़ितों के साथ अन्याय करते दिख रही है।

कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने 21 मई को सरकार के इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि लंबे समय से विभिन्न किसान संगठनों, प्रो-कन्नड़ समूहों और अन्य संगठनों की ओर से मामलों को वापस लेने की मांग की जा रही थी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इन मामलों को कैबिनेट की एक उपसमिति के पास भेजा था, जिसने प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा के बाद कानूनी रूप से उन्हें वापस लेने की सिफारिश की।

सरकार द्वारा वापस लिए गए मामलों में कावेरी आंदोलन, कलसा-बंडूरी आंदोलन और प्रो-कन्नड़ संगठनों से जुड़े मामले हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से 10 मामले कन्नड़ कार्यकर्ता वटल नागराज और अन्य आंदोलनकारियों से जुड़े थे। मंत्री एच.के. पाटिल ने कहा कि इनमें से कुछ मामलों पर कर्नाटक हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है।

हालांकि सबसे अधिक चर्चा कलबुर्गी जिले के आलंद में वर्ष 2022 में हुई हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने को लेकर हो रही है। उस समय हिंदू संगठनों ने दरगाह परिसर में स्थित राघवचैतन्य शिवलिंग पर पूजा-अर्चना करने का कार्यक्रम बनाया था। दौरान मुस्लिम असामाजिक तत्वों द्वारा शिवलिंग पर मानव मल फेंके जाने के बाद हिंदू संगठनों ने शुद्धिकरण पूजा का आह्वान किया था।

जैसे ही हिंदू समूह दरगाह की ओर बढ़े, वहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी जमा हो गए। उसी दिन शब-ए-बरात के अवसर पर दरगाह में कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। आरोप है कि दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद तनाव बढ़ गया और हिंसा भड़क उठी।

रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ ने पथराव किया जिसमें कई लोग घायल हो गए। हिंसा के दौरान केंद्रीय मंत्री भगवान्त खुबा, पूर्व विधायक

हिंदुओ के खिलाफ दंगों के 7 मामलों सहित 52 अपराधिक मामलों को वापस लेगी कांग्रेस सरकार
2022 में दरगाह परिसर में हिंदुओं और पुलिस हमले से जुड़े मामलों की वापसी पर विवाद, हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्यभर में दर्ज 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इन मामलों में वर्ष 2022 में कलबुर्गी जिले के आलंद स्थित लाडले माश्ताक दरगाह परिसर में हुई हिंदुओ पर हुई हिंसा से जुड़े 7 मामले भी शामिल हैं। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस अपने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए हिंदू पीड़ितों के साथ अन्याय करते दिख रही है।

कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने 21 मई को सरकार के इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि लंबे समय से विभिन्न किसान संगठनों, प्रो-कन्नड़ समूहों और अन्य संगठनों की ओर से मामलों को वापस लेने की मांग की जा रही थी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इन मामलों को कैबिनेट की एक उपसमिति के पास भेजा था, जिसने प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा के बाद कानूनी रूप से उन्हें वापस लेने की सिफारिश की।

सरकार द्वारा वापस लिए गए मामलों में कावेरी आंदोलन, कलसा-बंडूरी आंदोलन और प्रो-कन्नड़ संगठनों से जुड़े मामले हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से 10 मामले कन्नड़ कार्यकर्ता वटल नागराज और अन्य आंदोलनकारियों से जुड़े थे। मंत्री एच.के. पाटिल ने कहा कि इनमें से कुछ मामलों पर कर्नाटक हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है।

हालांकि सबसे अधिक चर्चा कलबुर्गी जिले के आलंद में वर्ष 2022 में हुई हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने को लेकर हो रही है। उस समय हिंदू संगठनों ने दरगाह परिसर में स्थित राघवचैतन्य शिवलिंग पर पूजा-अर्चना करने का कार्यक्रम बनाया था। दौरान मुस्लिम असामाजिक तत्वों द्वारा शिवलिंग पर मानव मल फेंके जाने के बाद हिंदू संगठनों ने शुद्धिकरण पूजा का आह्वान किया था।

जैसे ही हिंदू समूह दरगाह की ओर बढ़े, वहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी जमा हो गए। उसी दिन शब-ए-बरात के अवसर पर दरगाह में कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। आरोप है कि दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद तनाव बढ़ गया और हिंसा भड़क उठी।

रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ ने पथराव किया जिसमें कई लोग घायल हो गए। हिंसा के दौरान केंद्रीय मंत्री भगवान्त खुबा, पूर्व विधायक बीआर पाटिल, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के वाहनों पर भी हमला किया गया। पुलिस पर भी पथराव की घटनाएं सामने आई। इसके बाद कलबुर्गी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 महिलाओं सहित 167 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था।

इन आरोपियों के खिलाफ कर्नाटक महामारी रोग अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे। इनमें दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं शामिल थीं।

सरकार के फैसले का विरोध करते हुए अधिवक्ता और हिंदू कार्यकर्ता गिरीश भारद्वाज ने कहा कि इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दंगाइयों को संरक्षण देने और वोट बैंक की राजनीति करने के लिए अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है।

यह भी पढ़ें:

एसी नहीं है… कमरा कैसे रहेगा कूल? नौतपा में भी ठंडा रहेगा घर, अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

आरबीआई ने वित्त वर्ष 26 के लिए केंद्र को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड देने का किया ऐलान

कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, आज दिल्ली में पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,041फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
321,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें