NGO की आड़ में धर्मांतरण और यौन शोषण का खेल; रियाज काजी गिरफ्तार

नागपुर में आतंकवाद निरोधी दस्ते ने शुरू की जांच

NGO की आड़ में धर्मांतरण और यौन शोषण का खेल; रियाज काजी गिरफ्तार

Conversion and sexual exploitation under the guise of an NGO; Riyaz Qazi arrested

महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस (TCS) बीपीओ में सामने आए धर्मांतरण, यौन शोषण और उत्पीड़न रैकेट के बाद अब उपराजधानी नागपुर से भी एक धर्मांतरण का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ ‘यूनिवर्सल मल्टीपर्पस सोसाइटी’ (Universal Multipurpose Society) नामक NGO चलाने वाले रियाज फैजल काजी को महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण के दबाव और साइबर स्टॉकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और खुफिया एजेंसियों ने भी जांच में कदम रख दिया है। अधिकारी अब इस संगठन के फंडिंग स्रोतों, इसके इतिहास और संभावित विदेशी संबंधों की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं।

इस मामले में मुख्य शिकायतकर्ता एनजीओ की 23 वर्षीय एडमिनिस्ट्रेशन और HR हेड है। प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, 18 जुलाई 2024 को पीड़िता का जन्मदिन मनाने के बाद, आरोपी रियाज काजी ने उसे अपने केबिन में बुलाया। वहां उसने सीसीटीवी (CCTV) का कनेक्शन काट दिया और पीड़िता को उसकी इच्छा के विरुद्ध गले लगाया और माथे पर चूमा। आरोपी ने पीड़िता से कहा, “मैं आज तुम्हें छोड़ना नहीं चाहता।” पीड़िता ने नौकरी खोने के डर से उस समय चुप्पी साधे रखी, जिसका फायदा उठाकर काजी अकेले पाकर बार-बार छेड़छाड़ करने लगा।

जांच में यह भी सामने आया है कि रियाज काजी ‘फिक्र फाउंडेशन’ और ‘पढ़े हम, पढ़ाएं हम’ जैसे नामों से भी संचालितअपने NGO का इस्तेमाल महिलाओं पर धर्मांतरण का दबाव बनाने के लिए करता था।

पीड़िता के अनुसार NGO की सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर, जो की पीड़िता की बड़ी बहन है, उसे भी जबरन ऐसे कपड़े पहनने पर मजबूर किया गया जिससे उसका पूरा शरीर ढका रहे। साथ ही, फील्ड विजिट के दौरान उसे सुरक्षित रहने के लिए इस्लामिक प्रार्थनाएं दोहराने के लिए मजबूर किया गया।

एनजीओ में काम करने वाली अन्य महिला शिक्षकों ने भी शिकायत की है कि गैर-मुस्लिम होने के बावजूद उन पर इस्लामिक रीति-रिवाजों को मानने का दबाव डाला जाता था।

आरोपी रियाज काजी ने महिला कर्मचारियों और वॉलंटियर्स की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उसने पीड़िता और अपने नाम को मिलाकर इंस्टाग्राम पर एक फर्जी अकाउंट बनाया ताकि वह उनकी हर हरकत को ट्रैक कर सके।

इतना ही नहीं, जब कुछ महिलाओं ने NGO छोड़ने का फैसला किया, तो काजी ने उनके परिजनों को फोन कर उनके चरित्र पर कीचड़ उछाला। 13 अप्रैल को उसने एक पूर्व कर्मचारी की मां को फोन कर उसकी बेटियों और सहयोगियों को कॉल गर्ल और वेश्या जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया।

मानकापुर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक हरेश कलसेकर ने बताया कि अदालत ने रियाज काजी को 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अब तक तीन महिलाएं औपचारिक रूप से शिकायत लेकर सामने आई हैं, और यह संख्या बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा, “हम इस मामले की हर एंगल से जांच कर रहे हैं। एटीएस इस बात की जांच कर रही है कि समाज सेवा के नाम पर चल रहे इस एनजीओ को पैसा कहां से मिल रहा था और क्या इसका उद्देश्य केवल धर्मांतरण और शोषण ही था।”

नागपुर की यह घटना नासिक के टीसीएस बीपीओ में सामने आए उस रैकेट की याद दिलाती है, जहां मुस्लिम टीम लीडर्स के एक समूह ने 18 से 25 वर्ष की हिंदू महिला कर्मचारियों को निशाना बनाया था। वहां भी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने, जबरन मांसाहार खिलाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने के मामले सामने आए थे। महाराष्ट्र में एक के बाद एक सामने आ रहे ये मामले किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।

रियाज काजी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करना), 302(1) (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 356(2) (मानहानि) और आईटी एक्ट की धारा 66-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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