रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार (21 अप्रैल)से जर्मनी के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना है। दौरे के दौरान वह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
यह दौरा पिछले सात वर्षों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली जर्मनी यात्रा है। इससे पहले फरवरी 2019 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जर्मनी का दौरा किया था। वहीं, बोरिस पिस्टोरियस जून 2023 में भारत आए थे, जहां उनकी राजनाथ सिंह के साथ विस्तृत बातचीत हुई थी।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरान भारत-जर्मनी के बीच प्रस्तावित पनडुब्बी सौदे पर चर्चा होने की संभावना है। ‘प्रोजेक्ट 75I’ के तहत भारत में छह अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण की योजना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹70,000 करोड़ से ₹99,000 करोड़ के बीच बताई जा रही है।
इन पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में जर्मनी की रक्षा कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के सहयोग से किया जाना प्रस्तावित है। यह परियोजना भारतीय नौसेना के पुराने हो रहे बेड़े के आधुनिकीकरण और समुद्री सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने, दोनों सेनाओं के संबंधों को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा ड्रोन जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा होगी। दौरे के दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रशिक्षण में सहयोग से संबंधित एक समझौते पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है।
राजनाथ सिंह जर्मनी के रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर सकते हैं, ताकि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके। यह भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और तकनीकी हस्तांतरण को प्रोत्साहित करने की रणनीति का हिस्सा है।
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