दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों ने लखनऊ की रहने वाली महिला डॉक्टर शाहिना शाहिद को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि वह पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के लिए भारत में उसके महिला विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ को स्थापित करने की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। यह गिरफ्तारी Faridabad में JeM के मॉड्यूल के भंडाफोड़ और एक कार से असॉल्ट राइफल मिलने के बाद हुई है।
सूत्रों के अनुसार, शाहिना शाहिद का सीधा संपर्क डॉ. मोहम्मद उमर से था, जो कथित तौर पर वही व्यक्ति हैं, जो उस कार को चला रहा था जिसमें सोमवार शाम दिल्ली में विस्फोट हुआ और 12 लोगों की मौत हो गई। यह घटना अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
जांच में खुलासा हुआ है कि इस मॉड्यूल का संचालन शिक्षित और पेशेवर व्यक्तियों के नेटवर्क के माध्यम से किया जा रहा था। इसमें डॉक्टर, विश्वविद्यालय से जुड़े लोग और शोधकर्ता शामिल हैं, जिससे वे सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बच पाए।
अधिकारियों के अनुसार, शाहिना शाहिद को पाकिस्तान में जैश के शीर्ष नेतृत्व ने विशेष जिम्मेदारी सौंपी थी। जमात-उल-मोमिनात को पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित मार्कज़ उस्मान-ओ-अली से संचालित किया जाता है और इसका प्रमुख नेतृत्व सादिया अज़हर, जो जैश संस्थापक मसूद अज़हर की बहन हैं, के पास है।
शाहिना शाहिद लखनऊ के लाल बाग इलाके की रहने वाली हैं। उनकी गिरफ्तारी तब हुई जब जांच में उनके और डॉ. मुजम्मिल गनई उर्फ़ मुसैब (पुलवामा निवासी और फ़रीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पूर्व डॉक्टर) के बीच लगातार संपर्क का प्रमाण मिला। बताया गया है कि शाहेना जम्मू-कश्मीर की कई यात्राएँ कर चुकी थीं, जहाँ वह संभावित भर्तियों और फ़ंडिंग नेटवर्क से जुड़ी थीं।
जांचकर्ताओं का अनुमान है कि इस मॉड्यूल ने लगभग ₹35–40 लाख की धनराशि जुटाई थी, जिसमें एक बड़ा हिस्सा शाहिना शाहिद के नेटवर्क के माध्यम से आया। जिस कार में हथियार मिले थे, वह भी उनके नाम पर पंजीकृत है, जिससे उनके खिलाफ सबूत और मजबूत हो गए हैं।
फिलहाल, NIA मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमात-उल-मोमिनात का भारतीय नेटवर्क कितना विस्तृत है और इसमें और कौन-कौन शामिल है। मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
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