अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर पॉक्सो के तहत प्राथमिकी दर्ज !

अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर पॉक्सो के तहत प्राथमिकी दर्ज !

FIR registered against Avimukteshwarananda and his disciple under POCSO!

प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के तथाकथित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामला शाकुंभरी पीठ के पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर एक आवेदन से शुरू हुआ, उन्हीं के आरोप के तहत विशेष पॉक्सो न्यायालय (एडीजे रेप एवं पॉक्सो) ने उनके और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश प्रयागराज की अदालत से जारी हुआ, जिसके बाद आध्यात्मिक जगत में हलचल तेज हो गई है।

शुक्रवार (20 फरवरी) को एडीजे विनोद कुमार चौरसिया की अदालत में इस संवेदनशील प्रकरण पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दो नाबालिगों के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ दर्ज किए गए। यह कार्रवाई यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के प्रावधानों के तहत की गई।

अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और प्रस्तुत साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। शनिवार (21 फरवरी 2026) को अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए। आदेश के अनुसार, मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज किया जाएगा और विधि अनुसार जांच शुरू की जाएगी। याचिकाकर्ता अशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि उन्होंने इस प्रकरण से संबंधित एक महत्वपूर्ण सीडी भी अदालत में प्रस्तुत की है।

अदालत के आदेश के बाद पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटनाक्रम ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, क्योंकि मामला एक प्रमुख धार्मिक पद से जुड़े व्यक्ति से संबंधित है।

गंभीर आरोपों के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे अपनी छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया। स्वामी ने कहा, “मैं गौ माता की गरिमा के लिए आवाज उठाने की कीमत चुका रहा हूं।”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पॉक्सो एक्ट के नियमों के उल्लंघन में उनकी पहचान सार्वजनिक क्यों की जा रही है। उनका आरोप है कि जानबूझकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “सत्य को डरने की ज़रूरत नहीं है। मैं इन कथित झूठे आरोपों से भयभीत नहीं हैं।”

फिलहाल अदालत के निर्देश के बाद पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने और जांच की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां साक्ष्यों और दर्ज बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगी।

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