जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को 30 वर्ष पुराने एक मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार(17 अप्रैल) शाम गिरफ्तार किया। उन्हें मार्च महीने में ही दो अलग-अलग मामलों में जमानत मिली थी। 1996 में पुलिस पर हमले से जुड़े आरोपों के मामले में एनआईए की श्रीनगर शाखा ने शाह को गिरफ्तार कर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। अदालत ने तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर करने के बाद एनआईए उन्हें जम्मू-कश्मीर ले गई। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट और पटियाला हाउस कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में उन्हें जमानत दी थी। लगभग 39 साल हिरासत और नजरबंदी में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी।
12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आतंकवादी फंडिंग मामले में जमानत दी थी। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अपनी याचिका में उन्होंने बताया था कि उनकी उम्र 74 वर्ष है और वे छह साल से अधिक समय से जेल में हैं। साथ ही, इस मामले में करीब 400 गवाह हैं, जिनमें से अब तक केवल 15 के बयान दर्ज किए गए हैं।
शाह पर जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में शामिल होने और आतंकवादी फंडिंग जुटाने का आरोप है। एनआईए ने इस मामले में कई आरोपपत्र दाखिल किए हैं, जिनमें बाद में शाह का नाम जोड़ा गया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से 1990 के दशक के पुराने भाषणों पर आधारित साक्ष्यों को लेकर एनआईए से कई सवाल किए थे। अदालत ने पूछा था कि इतने पुराने सबूतों पर कितना भरोसा किया जा सकता है और छह साल से अधिक समय तक हिरासत में रखने का ठोस कारण क्या है।
इस बीच, पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 मार्च को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी शाह को जमानत दे दी थी। 2019 में एनआईए ने उन्हें टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के बॉन्ड पर जमानत दी थी।
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