झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित चक्रधरपुर रेलमंडल के रंगरा-करमपाड़ा रेलखंड पर नक्सलियों की एक बड़ी साजिश समय रहते विफल हो गई। 2 और 3 अगस्त की रात नक्सलियों ने रेलवे ट्रैक पर माओवादी झंडा और बैनर लगाकर दहशत फैलाने और रेल यातायात को बाधित करने की कोशिश की।
घटना उस वक्त सामने आई जब ट्रेन के लोको पायलट ने ट्रैक पर लगे संदिग्ध झंडा और बैनर को देखा और सतर्कता दिखाते हुए इंजन को समय रहते रोक दिया। इस सावधानी से एक संभावित बड़ा रेल हादसा टल गया। हालांकि, इसके कुछ ही घंटों बाद सुबह 6:40 बजे किमी संख्या 477/34-35 पर जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे ट्रैक के नीचे लगे स्लीपर चकनाचूर हो गए और रेल लाइन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। सौभाग्यवश, धमाके के समय कोई ट्रेन उस स्थान से नहीं गुजर रही थी, जिससे जानमाल की क्षति नहीं हुई।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), ओडिशा पुलिस और रेलवे इंजीनियरिंग टीम मौके पर पहुंच गई। जांच शुरू की गई और ट्रैक को सामान्य करने का कार्य तत्परता से शुरू हो गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि सुबह होते-होते माओवादी झंडा रहस्यमय तरीके से घटनास्थल से गायब हो चुका था।
रेलवे प्रशासन ने इस गंभीर घटना को लेकर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और घटनास्थल पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां इस नक्सली गतिविधि की तह तक पहुंचने के लिए संयुक्त जांच में जुट गई हैं।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब नक्सली अक्सर सालगिरह और अपनी तथाकथित शहादत सप्ताह के दौरान इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं। रेलवे की सजगता और समय पर लिए गए निर्णय ने इस बार एक बड़ा रेल हादसा टलने से बचा लिया। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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