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लाल किले धमाका: आरोपी के फोन में मिले ड्रोन और रॉकेट लॉन्चर के वीडियो

‘हमास-स्टाइल’ हमले की साज़िश बेनकाब

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दिल्ली में 10 नवंबर को हुए लाल किले धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा मिला है। जांच में यह सामने आया है कि इस आतंकवादी हमले की साजिश रचने वाले आरोपी हमास-स्टाइल हमले की तैयारी कर रहे थे। लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट में दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और कई गंभीर रूप से घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला था कि यह हमला पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक अंतर-राज्यीय मॉड्यूल द्वारा अंजाम दिया गया था। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काज़ीगुंड निवासी जासिर बिलाल वानी भी इन गिरफ्तार लोगों में शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने गिरफ्तार किए गए जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश के मोबाइल फोन की गहन जांच में NIA को कई अहम डिजिटल सबूत मिले। एजेंसी ने फोन के डिलीटेड फोल्डर से दर्जनों तस्वीरें और वीडियो बरामद किए, जिनमें हथियारबंद ड्रोन, रॉकेट लॉन्चर और विस्फोटक लगाने की तकनीक से जुड़े वीडियो ट्यूटोरियल शामिल थे। यह सामग्री वानी को विदेशों में बैठे उसके हैंडलरों द्वारा एक विशेष ऐप के माध्यम से भेजी गई थी। ऐप पर एजेंसी को विदेशी हैंडलरों के कई संपर्क नंबर भी मिले हैं।

जांच अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों का उद्देश्य ऐसे मॉडिफाइड ड्रोन तैयार करना था, जो 25 किलोमीटर तक उड़ान भर सकें और उन पर विस्फोटक पेलोड लगाया जा सके। NIA को यह भी पता चला कि मॉड्यूल हमास द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ग्लाइडिंग रॉकेट्स का अध्ययन कर रहा था। रिपोर्ट में इंडोविंग्स के CEO और संस्थापक पारस जैन के हवाले से कहा गया कि ऐसे रॉकेट्स को ज़मीन से या हाथ से भी लॉन्च किया जा सकता है, जो कम लागत में व्यापक असर पैदा करने का तरीका है। एक रॉकेट को लॉन्च करने में लगभग 20 सेकंड लगते हैं और तीन रॉकेट तीन मिनट में दागे जा सकते हैं। इन रॉकेट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हमास द्वारा किया जाता है।

जासिर वानी राजनीतिक विज्ञान में स्नातक है और यही व्यक्ति इस मॉड्यूल का तकनीकी विशेषज्ञ बताया गया है। वह ड्रोन को उच्च क्षमता वाली बैटरी और कैमरों से लैस कर उन्हें संशोधित करता था। इसके अलावा, वह ड्रोन पर विस्फोटक पेलोड लगाने और छोटे आकार के रॉकेट बनाने की भी कोशिश कर रहा था।

जांच के अनुसार, वानी की मुलाकात लाल किला ब्लास्ट के मास्टरमाइंड आरोपी डॉ. उमर उन नबी से अक्टूबर 2024 में कुलगाम की एक मस्जिद में हुई थी। इसके बाद कई महीनों तक नबी ने वानी को कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित किया और उसे आत्मघाती हमला करने के लिए तैयार करने की कोशिश की।

हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद वानी ने आत्मघाती हमले के लिए सहमति नहीं दी। उसने अप्रैल 2025 में मॉड्यूल से हटने की बात कह दी और बताया कि वह आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा है और इस्लाम में स्वयं का जीवन समाप्त करना वर्जित है। NIA के अनुसार, वानी के पीछे हटने के बाद उसे तकनीकी सहायता की भूमिका में डाल दिया गया।

जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी मॉड्यूल की कार्यप्रणाली, विदेशी नेटवर्क और हथियारों के तकनीकी प्रयोग से जुड़े इस नए खुलासे ने यह संकेत दिया है कि दिल्ली में हमास-स्टाइल हमले की एक विस्तृत साजिश रची जा रही थी। NIA आतंकियों की तकनीकी क्षमताओं, विदेशी फंडिंग और कम्युनिकेशन चैनलों की और जांच कर रही है, ताकि इस नेटवर्क के सभी शातिर लिंक उजागर किए जा सकें।

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