मुंबई के बांद्रा पूर्व स्थित ‘गरीब नगर’ झुग्गी बस्ती क्षेत्र में मंगलवार (19 मई) को अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पश्चिम रेलवे ने यह ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया है। इसी अभियान के तहत दूसरे दिन यानी 20 मई को भी कार्रवाई जारी रही, जिसके दौरान इलाके में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली।
रेलवे की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया और नाराजगी जताई, जिससे क्षेत्र में भारी हंगामा हुआ। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर बोतलें फेंकी, जबकि कुछ महिलाओं ने पानी और बाल्टियां फेंककर विरोध प्रदर्शन किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बल भी बुलाया। लगातार दूसरे दिन जारी इस अभियान के दौरान कुछ स्थानीय युवकों द्वारा पुलिस पर पथराव किए जाने की भी घटना सामने आई। इसके बाद पुलिस ने दोबारा लाठीचार्ज कर कुछ युवकों को हिरासत में लिया।
मुंबई उच्च न्यायालय ने 6 मई को हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई में पश्चिम रेलवे प्रशासन को इस ध्वस्तीकरण अभियान को आगे बढ़ाने की औपचारिक अनुमति दी थी। हालांकि, अदालत ने प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है।
अदालत के निर्देशानुसार, 2021 में प्रशासन द्वारा किए गए आधिकारिक सर्वेक्षण में जिन झुग्गी निवासियों को ‘पात्र’ घोषित किया गया है, उनके घरों और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। इसका मतलब है कि केवल अवैध और अपात्र घोषित निर्माणों पर ही बुलडोजर चलाया जाएगा।
पश्चिम रेलवे की जमीन पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए यह अभियान लगातार पांच दिनों तक चलेगा। 19 मई से 23 मई तक चलने वाले इस व्यापक अभियान को मुंबई उच्च न्यायालय की मंजूरी मिलने के बाद ही पश्चिम रेलवे ने यह कड़ा कदम उठाया है।
पिछले कई वर्षों से रेलवे की महत्वपूर्ण जमीनों पर अवैध कब्जा कर ये बस्तियां बसाई गई थीं। रेलवे परियोजनाओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन जमीनों को खाली कराना आवश्यक बताया गया है।
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