महाराष्ट्र पुलिस ने हैदराबाद में किया मेफेड्रोन ड्रग लैब का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

महाराष्ट्र पुलिस ने हैदराबाद में किया मेफेड्रोन ड्रग लैब का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

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महाराष्ट्र की मीरा-भाईंदर-वसई विरार (MBVV) क्राइम ब्रांच ने हैदराबाद में एक बड़े मेफेड्रोन (MD) निर्माण कारखाने का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपए मूल्य का कच्चा माल जब्त किया गया और फैक्ट्री चलाने वाले एक कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि छापा शुक्रवार को चेरलापल्ली, नवोदय कॉलोनी स्थित फैक्ट्री पर मारा गया। आरोपी श्रीनिवास विजय मूर्ति वोलेटी (34) और उसका सहयोगी तानाजी पंढरीनाथ पाटिल यहां पर मेफेड्रोन का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहे थे। ये लोग ड्रग्स को मुंबई महानगर क्षेत्र (MMA) में सप्लाई करने वाले पेडलर्स को बेचते थे।

पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी चल रही जांच का हिस्सा है, जिसके तहत अब तक 10 अन्य लोगों को पहले ही पकड़ा जा चुका है।

इस मामले की शुरुआत 8 अगस्त को हुई थी, जब क्राइम ब्रांच ने मुंबई के काशीमीरा बस स्टॉप के पास से 23 वर्षीय फातिमा मुराद शेख उर्फ मौला को 105 ग्राम एमडी के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि वह बांग्लादेश मूल की अवैध प्रवासी है, जिसके चलते उसे NDPS Act, 1985 के साथ-साथ इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत भी बुक किया गया।

पूछताछ में फातिमा ने बताया कि उसने यह ड्रग्स कादर बदशाह रहमान शेख (41) से खरीदे थे। आगे की जांच में पुलिस ने उसके नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह और आरोपियों को पकड़ा, जिनमें फिरोज नियाज शेख (39) भी शामिल था। इनके पास से ₹5.5 लाख मूल्य का एमडी भी बरामद हुआ। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में मुस्तफा यूनुस खान (22), इमरान असलम खान (33), फिरोज असलम खान (33), जावेद असलम खान (38) और सलीम खान (38) शामिल हैं।

एमबीवीवी पुलिस कमिश्नर निकेट कौशिक ने बताया कि अब तक की कार्रवाई में 5.968 किलो मेफेड्रोन, 27 मोबाइल फोन, तीन चारपहिया वाहन, चार इलेक्ट्रॉनिक स्केल, रसायन और अन्य निर्माण सामग्री तथा ₹23.97 लाख नकद जब्त किए गए हैं।

जांच से यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी वोलेटी दो कंपनियां चलाता था। उसने 2015 में वाग्देवी इनोसाइंस नामक रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनी शुरू की थी, जबकि 2020 में कोविड टेस्ट किट बनाने के नाम पर वाग्देवी लैब की स्थापना की। बाद में इन्हीं इकाइयों का इस्तेमाल ड्रग उत्पादन के लिए किया गया। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क बेहद संगठित है और मुंबई समेत देश के कई हिस्सों में इसकी सप्लाई चेन फैली हुई है। जांच एजेंसियां अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं।

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