जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 116 व्यक्तियों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा केंद्रशासित प्रदेश में नशीले पदार्थों और मादक पदार्थों से जुड़े आतंकवाद (नार्को-टेरर) के खिलाफ अभियान तेज किए जाने के बाद इस कार्रवाई को गति मिली है।
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम जम्मू-कश्मीर में सक्रिय नशीले पदार्थों के नेटवर्क, उनके आर्थिक संबंधों और युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर रोक लगाने के लिए शुरू किए गए व्यापक अभियान का हिस्सा है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पिछले कुछ हफ्तों से विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। शनिवार (23 मई) को उन्होंने दक्षिण कश्मीर के शोपियां में एक बड़ी पदयात्रा का नेतृत्व किया, जिसमें अधिकारियों के अनुसार करीब 50,000 लोगों ने हिस्सा लिया।
पदयात्रा के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि क्षेत्र में आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के बीच सीधा संबंध है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा, “आतंकी संगठन नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त धन से हथियार खरीदते हैं, और उन्हीं हथियारों से आम कश्मीरियों का खून बहाया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि जो भी व्यक्ति किसी भी रूप में ड्रग्स रैकेट को समर्थन देता पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। “चाहे वह कोई अधिकारी हो या सार्वजनिक जीवन से जुड़ा कोई व्यक्ति, यदि वह किसी भी तरह से नशीले पदार्थों के नेटवर्क से जुड़ा है या उसका समर्थन करता है, तो उसे कठोर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।”
नशीले पदार्थों को समाज में फैलने वाला संक्रमण बताते हुए सिन्हा ने कहा, “यदि इस संक्रमण का थोड़ा भी अंश हमारे शरीर में प्रवेश कर चुका है, तो उसे बिना किसी संकोच के निर्दयता से बाहर निकाल दिया जाएगा।”
‘नशा-मुक्त जम्मू और कश्मीर अभियान’ की शुरुआत 11 मई को की गई थी। तब से अब तक प्रशासन ने पूरे केंद्रशासित प्रदेश में 797 एफआईआर दर्ज की हैं और 890 से अधिक कथित ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस कार्रवाई के दौरान नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन से कथित रूप से बनाई गई 81 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया है।
रद्द किए जाने के लिए चिन्हित 116 पासपोर्टों में से 94 जम्मू संभाग के हैं, जबकि 22 कश्मीर घाटी के हैं।
सख्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासन नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के पुनर्वास पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार व्यसनमुक्ति कार्यक्रमों, रोजगार के अवसरों और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए एक व्यापक पुनर्वास नीति तैयार कर रही है।
उन्होंने नशा विरोधी अभियान में महिलाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले ही 7,000 से अधिक महिला समितियां गठित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, “इन समितियों को सशक्त बनाना और यह सुनिश्चित करना कि वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें, अब प्रशासन की जिम्मेदारी है।”
उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अब यह समझ में आ गया है कि नशीले पदार्थों की लत कोई दूर की समस्या नहीं, बल्कि समाज पर सीधा और तत्काल प्रभाव डालने वाली गंभीर चुनौती बन चुकी है।
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